नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) के पेपर लीक मामले को लेकर अखिल भारतीय छात्रों संघ (AIDSO) ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। इस विरोध का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की भूमिका पर सवाल उठाना और NEET परीक्षा की समाप्ति की मांग करना है। AIDSO का तर्क है कि पेपर लीक जैसी बड़ी समस्या शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी और अनैतिकता को दर्शाती है, जिससे छात्र राजनीति में असमानता बढ़ रही है।
AIDSO के नेताओं का कहना है कि NEET परीक्षा में पेपर लीक होना छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। यह न केवल निष्पक्षता को प्रभावित करता है, बल्कि समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए अवसरों को भी कम करता है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि NTA की जगह एक विश्वसनीय और पारदर्शी एजेंसी को परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान, AIDSO के सदस्य सड़कों पर निकलकर नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना था कि अभी तक की हुई जांच अस्पष्ट रही है और दोषियों को सजा नहीं दी गई है। इस मामले की उचित जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इसके अलावा, AIDSO ने NEET परीक्षा प्रणाली की जटिलता और तनावपूर्ण प्रकृति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि मानसिक उत्पीड़न का कारण भी बन रही है, जिससे कई छात्र मानसिक दबाव में आकर अपनी पढ़ाई से निराश हो रहे हैं।
अखिल भारतीय छात्रों संघ ने यह भी उल्लेख किया कि शिक्षा प्रणाली को व्यापक सुधार की आवश्यकता है, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से चयन प्रणाली अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और समावेशी बनानी होगी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि पहले से मौजूद सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान अवसर प्रदान किए जाएं।
समापन करते हुए, AIDSO ने NEET की जगह एक वैकल्पिक परीक्षा प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है जो परीक्षा के दबाव को कम करे और छात्रों की प्रतिभा और योग्यता को सही तरीके से परख सके। उन्होंने साफ किया कि शिक्षा की गुणवत्ता और अधिकारों की रक्षा के लिए छात्र समुदाय पूरी तरह सजग और सक्रिय रहेगा।

