मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने केंद्र एवं राज्य सरकार को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचाने के आह्वान का समर्थन करेंगे, लेकिन इसके पहले सरकार को मराठा समाज की लंबित मांगें पूरी करनी होंगी। यदि सरकार इन मांगों को नहीं मानती है, तो आंदोलन अपने तय प्रारूप के अनुसार जारी रहेगा और मराठी लोग भारी संख्या में सड़कों पर उतरेंगे।
जरांगे ने कहा, “हमारा आंदोलन ठहराव से नहीं रुकने वाला। जब आपके मंत्री सार्वजनिक दौरे पर हवाई जहाज से आराम से जा सकते हैं, तो हम अपने संघर्ष में क्यों पीछे हटें? यह गलत नहीं है। मराठी समाज का भविष्य दांव पर है। हमारे बच्चों के भविष्य की अनदेखी करने का किसी को अधिकार नहीं।”
उन्होंने बताया कि ईंधन बचाने का मतलब यह नहीं कि गरीब मराठा समाज की समस्याओं को अनदेखा किया जाए। “हमें लगता है कि सरकार को हमारी मांगें सुननी चाहिए और तभी हम ईंधन बचाने की अपील का समर्थन देंगे। डीजल, पेट्रोल की बचत करनी ज़रूरी है लेकिन साथ ही हमारे बच्चों के भविष्य की चिंता भी उतनी ही जरूरी है।”
जरांगे ने कृषि सत्र का हवाला देते हुए कहा कि इस दौरान किसानों को बीज, खाद, फवारणी के लिए डीजल की जरूरत होती है। ट्रैक्टर चलाना पड़ता है। ऐसे में ईंधन बचाओ के नाम पर किसी तरह का संकट किसानों के लिए स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री को स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए और यह भरोसा देना चाहिए कि किसानों को ईंधन की कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा, “गरीब और किसान वर्ग ने हमेशा पीएम मोदी का समर्थन किया है। हर बार उनका आह्वान हमारी जनता ने मान्य किया है, लेकिन हमारा भी अधिकार है कि हम जब अपनी मांगें रखें तो उन्हें गंभीरता से लिया जाए।”
मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण को लेकर सरकार पर कुछ गंभीर आरोप भी लगाते हुए कहा कि शिंदे समिति की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हो पाई हैं, केस वापस नहीं लिए जा रहे, विद्यार्थियों की सारथी योजना बंद कर दी गई है और हैदराबाद गजट द्वारा जारी जीआर के चलते प्रमाणपत्र वितरण भी रुके हुए हैं।
जरांगे ने स्पष्ट कहा, “अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानेगी तो हमारा आंदोलन थमेगा नहीं। जब हमारे बच्चों का भविष्य खतरे में होता है, तो हम जनता धूप और बारिश, दोनों में सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।”
उन्होंने सरकार से अपील की कि मराठा विद्यार्थियों की एडमिशन प्रक्रिया तुरंत आसान बनाई जाए और आरक्षण के सारे वादे पूरे किए जाएं ताकि समाज का भरोसा कायम रहे।

