महाराष्ट्र: मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिला एमवीए प्रतिनिधिमंडल, गहन मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग

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    मुंबई। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात कर आगामी विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची के संचालन में किसी भी प्रकार की पक्षपात से बचने तथा मतदान के अधिकार की सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बूथ स्तर पर चलाए जा रहे इस महत्वपूर्ण अभियान को इमानदारी और पारदर्शिता के साथ संचालित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाकर मतदान अधिकार से वंचित न किया जाए। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य सभी पात्र मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया में शामिल करना है और किसी भी स्तर पर भेदभाव की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

    चौकस निरीक्षण और उचित नियंत्रण के लिए एमवीए ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को 36 बिंदुओं वाला एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें गहन मतदाता सूची संशोधन को निष्पक्ष बनाने के लिए सुझाव और मांगें शामिल थीं। ज्ञापन में कम से कम सात दिन पूर्व बिना सूचना किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने से बचने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है, ताकि संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

    प्रतिनिधिमंडल में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे, अंबदास दानवे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और पूर्व विधायक सुनील भुसारा शामिल थे। इस समूह ने विशेष रूप से अन्य राज्यों में उन घटनाओं की चिंता जाहिर की, जहां कुछ समुदायों के मतदाताओं को मतदान से बाहर किया गया था।

    एमवीए के नेताओं ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में 3.5 करोड़ का इजाफा हुआ है, जिससे यह प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण बन गई है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वर्तमान में राज्य में अगले दो-तीन वर्षों तक कोई बड़ा चुनाव निर्धारित नहीं है, इसलिए मतदाता सूची के सावधानीपूर्वक, सही और जांचने-परखने के बाद पूरी प्रक्रिया को डेढ़ से दो साल तक समय दिया जा सकता है।

    इस गंभीर विषय पर चर्चा करते हुए, एमवीए ने मांग की कि विशिष्ट गहन संशोधन के आंकड़ों को राजनीतिक दलों के साथ मशीन पठनीय प्रारूपों जैसे सॉफ्ट कॉपी, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक के लिये उपलब्ध कराया जाए ताकि डेटा की जांच और सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। साथ ही, हार्ड कॉपी में भी ये आंकड़े उपलब्ध होने चाहिए। मतदाता पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी स्तर पर पांच साल तक इन आंकड़ों का सुरक्षित भंडारण भी जरूरी बताया गया।

    इस मुलाकात के बाद राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है ताकि महाराष्ट्र में स्वतंत्र, निष्पक्ष, और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जा सके। एमवीए का मानना है कि यदि चुनावों की नींव मजबूत और भरोसेमंद हो तो लोकतंत्र मजबूत होगा और सभी मतदाताओं का मतदान अधिकार सुरक्षित रहेगा।

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