जलगांव में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: डिप्टी रजिस्ट्रार और एक अन्य पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

Rashtrabaan

    जलगांव। भ्रष्टाचार विरोधी विभाग (एसीबी) जलगांव इकाई ने सहकारी विभाग में चल रही रिश्वतखोरी के मामले में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए जलगांव सहकारी समिति के उप रजिस्ट्रार जगदीश बाबूराव बारी और एक निजी व्यक्ति देवीदास धनसिंह पाटिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की दिशा में एक उदाहरण मानी जा रही है।

    एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अवैध साहूकारी के मामले की जांच के सिलसिले में जलगांव तालुका उप निबंधक के कार्यालय में अपने प्रकरण की अगली सुनवाई और जांच की स्थिति जानने के लिए संपर्क किया था। तभी उप रजिस्ट्रार जगदीश बारी ने उनसे रिश्वत के रूप में 5 लाख रुपए की मांग की। आरोप था कि शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज न किया जाए और रिपोर्ट जांच के दौरान अनुकूल रूप में प्रस्तुत की जाए। बाद में दोनों पक्षों के बीच वार्ता के बाद यह मांग घटाकर 3 लाख रुपए कर दी गई।

    शिकायतकर्ता ने 18 मई को इस संबंध में एसीबी जलगांव कार्यालय में विधिवत शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पंचों के सामने आरोपी अधिकारी ने रिश्वत मांगने की बात स्वीकार की। उसने यह भी कहा कि पहले के मामलों में शिकायतकर्ता द्वारा वकील नियुक्त किए जाने की वजह से नकारात्मक रिपोर्ट भेजी गई थी, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। लेकिन अब अनुकूल रिपोर्ट देने का आश्वासन भी दिया गया।

    तय राशि में से पहली किश्त के रूप में 1 लाख 50 हजार रुपए की मांग की गई, जिसे आरोपी जगदीश बारी ने निजी व्यक्ति देवीदास धनसिंह पाटिल को देने का निर्देश दिया। इस बीच 20 मई को एसीबी टीम ने प्रभावी जाल बिछाकर कार्रवाई की। जलगांव जिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक एसोसिएशन लिमिटेड के कार्यालय में आरोपी देवीदास पाटिल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। मौके से पूरी रकम जब्त की गई।

    इस कार्रवाई का पर्यवेक्षण पुलिस उप अधीक्षक योगेश ठाकुर ने किया, जबकि ट्रैप अधिकारी पुलिस निरीक्षक रेशमा अवतारे थीं। मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक स्मिता नवघारे कर रही हैं।

    भ्रष्टाचार विरोधी विभाग ने जनता से अपील की है कि यदि किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगी जाती है तो इसकी तुरंत शिकायत एसीबी से करें। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और इससे अधिकारी भी कानून का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।

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