Balaghat News : अवैध ईट भट्टो से जल रहे भ्रष्ट अधिकारियों के चुहले?

Rashtrabaan
Highlights
  • जांच में शिकायत सही पाई गई फिर जिम्मेदार नही कर रहे कार्यवाही
  • अवैध ईट भट्टो के मालिकों के गुलाम बन गए अधिकारी?
  • सवालों के जवाब देने से बच रहे अधिकारी

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में अवैध कारोबार करने वालो के जलबे हैं, उनके ख़िलाफ़ अधिकारी भी कार्यवाही करने से कतराते हैं। शिक्षयतो पर उन्हें विभागीय अधिकारी आमंत्रण दे कर बुलाते हैं लेकिन अवैध ईट भट्टो के मालिक नहीं आते। उनके मन मे कार्यवाही का कोई खौफ नहीं हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि मानो अवैध ईट भट्टा के कारोबारियों के यह प्रशासनिक अधिकारी गुलाम हैं और इन्हें वेतन ये अवैध ईट भट्टा के कारोबारी दे रहे हैं।

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बालाघाट। राष्ट्रबाण
मध्यप्रदेश का बालाघाट जिला वन बाहुल जिला है, जहा वन सम्पदा, खनिज सम्पदा, मेंगनीज प्रचूर मात्रा में पाई जाती है। यही कारण है कि बालाघाट जिले में अवैध कारोबार की भी बाढ़ आ चुकी है, जिसकी एक बानगी किरनापुर तहसील क्षेत्र में देखने मिल रही है। जहां वन सम्पदा का सर्वनाश करते हुए बेखौफ होकर अवैध ईंट भट्टे संचालित किये जा रहे है। बालाघाट जिले में ईंट भट्टो का संचालन ना सिर्फ अवैध रूप से होता है, अपितु नियम कायदो को भी सरेआम कूचला जा रहा है। लेकिन विडम्बना की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन व राजस्व अमला हमेशा से ऐसे अवैध ईट भट्टो पर कार्यवाही करने में गुरेज करता आ रहा है। जिसमें उनकी लंबी साठगांठ प्रतित होती है।
राष्ट्रबाण ने पिछले अंको में ही किरनापुर क्षेत्र में स्कूल के पास ईट भट्टो का संचालन होने की रिपोर्ट प्रकाशित कर चुका है, लेकिन शिकायतो और खबर प्रकाशन के बाद भी संबधित विभाग व प्रशासन मौन नजर आ रहा है और भट्टे संचालको के हौंसलो की उडान भी ईट भट्टो से निकलने वाले धुंए की तरह आसमान छू रही है।
बता दे कि किरनापुर तहसील मुख्यालय से लगे गोपालपुर गांव व आसपास के कुछ ईलाको में बड़े पैमाने पर स्थानीय प्रशासन के नाक नीचे ईट भट्टे संचालित हो रहे है, जिन्हे ना तो किसी प्रकार की अनुमति दी गई है और ना ही किसी नियमो का वहां पालन किया जा रहा है। ऐसी तस्वीर किरनापुर के गोपालपुर में देखने मिलेगी, जहां राजस्व अमले की निष्क्रियता के चलते आंगनवाडी और स्कूल भवन के समीप ही ईट भट्टे संचालित हो रहे है। इस मामले की शिकायत की भी जा चुकी है और पूर्व में खबर का प्रकाशन भी किया जा चुका है। लेकिन संबधित राजस्व अमला कार्यवाही करने में गुरेज कर रहा है। पटवारी प्रीति का कहना है कि उनकी टीम ने पंचनामा प्रकरण बनाकर प्रतिवेदन तहसील कार्यालय को प्रेषित कर दिया है, अब आगे की कार्यवाही तहसीलदार मैडम करेगी। उनके इस कथन से ऐसा लग रहा है कि मानो पटवारी प्रीति ने अपनी जिम्मेंदारी की आहूति दे दी है। चलिये मान लेते है कि उनके द्वारा तहसील कार्यालय में प्रकरण बना कर प्रतिवेदन जमा कर दिया गया है, लेकिन कार्यवाही कब होगी, वे स्पष्ठ नही कर पा रही है।
नियमो को ताक पर रखते हुए क्षेत्र में अवैध ईट भट्टो का संचालन होना, कार्यवाही को लेकर अधिकारियों का टालमटोल करना, पंचनामा प्रकरण बनाकर कार्यवाही लंबित रखना, राजस्व अमले के गैर जिम्मेंदाराना रवैये को ना सिर्फ उजागर करता है बल्कि सभी के बीच आपस में बडी साठगांठ होने की ओर भी ईशारा हो रहा है, जो अब तीखे सवालो को भी जन्म दे रहा है। यदि किरनापुर तहसील का संबधित राजस्व अमला निष्पक्ष, सक्रिय व संवेदनशील होता तो शायद अब तक उक्त ईट भट्टे व उसके संचालक पर कार्यवाही का बिगुल बज गया होता। परंतु उचित कार्यवाही ना होने के चलते अब अधिकारियो और कर्मचारीयों पर लग रहे गंभीर आरोपो से भी इंकार नही किया जा सकता। एसडीएम से लेकर तहसीलदार और आरआई से लेकर पटवारी तक की कार्यप्रणाली संदेहस्पंद है। कहा जा रहा है कि ईट भट्टे के अंदर सुलगने वाली आग से ना सिर्फ ईट पक रही है बल्कि किरनापुर एसडीएम, तहसीलदार, आरआई और पटवारी जैसे कर्मचारी के घर का चूल्हा भी जल रहा है। यदि ऐसा नही होता तो अब तक निष्पक्ष कार्यवाही हो चुकी होती?

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सरेआम दे रहे नियमो की आहुती
भारी मात्रा में ईट भट्टो का संचालन होना पर्यावरण के संतुलन को बिगाडने के लिये काफी है। गोपालपुर में स्कूल संस्था के पास ठेकेदार द्वारा ईट भट्टे का संचालन करना नियम कायदे की बलि चढाता नजर आ रहा है। जबकि नियमों के मुताबिक बस्ती, स्कूल, अस्पताल, सरकारी दफ्तर और वनक्षेत्रो के आस पास भट्टे नही खोल सकेंगे। अब इन जगहों से 800 मीटर की परिधि में कोई ईंट-भट्ठा नहीं खोला जा सकेगा। इसके साथ साथ नदियों से भी 500 मीटर की दूरी के बाद ही ईंट-भट्ठे संचालित हो सकेगें। इसी तरह नेशनल हाईवे से 300 मीटर, स्टेट हाईवे से 200 मीटर और रेलवे लाइन से भी 200 मीटर के अंदर ईट भट्ठो का संचालन नियमो के खिलाफ माना जायेगा।

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कार्यवाही के पक्ष में पटवारी प्रीति पारधी
जब इस मामले में हमारे प्रतिनिधि ने अधिकारीयों से चर्चायें की तो पूरे मामले को लेकर सिर्फ पटवारी प्रीति पारधी थोडी गंभीर नजर आई। जिन्होने माना है कि उक्त भट्टे का संचालन अवैध होने के साथ साथ नियम विरूद्ध भी है। जहां शिकायत के बाद उन्होने जांच प्रतिवेदन तैयार कर तहसीलदार कार्यालय भेज दिया है और आगे की कार्यवाही को अधिकारी तहसीलदार को होना बताया। पटवारी प्रीति पारधी का कहना है कि वे छोटे कर्मचारी है, उन्हे कार्यवाही का अधिकार नही है, कार्यवाही तो बडे अधिकारी ही करते है, मुझे भी नही पता कि उन्होने अब तक कार्यवाही क्यों नही की? उनके इस राग-विलाप में यह प्रतित हो रहा है कि पूरे अमले की नियत और नीति साफ नही है।

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निकिता मंडलोई, एसडीएम : अवैध ईट भट्टो पर कब होगी कार्यवाही?

क्या कार्यवाही हुई है उसकी जानकारी लेने के लिए ऑफिस आ जाओ, वहां पता चल जायेगा कार्यवाही कहा तक पहुंची हैं।

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निकिता मंडलोई, एसडीएम किरनापुर

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