उदय निधि स्टालिन पर बृज भूषण ने किया तीखा वार, लगाए रावण और हिरण्यकश्यप के वंशज होने के आरोप

Rashtrabaan

    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर विपक्ष के नेता और पूर्व मंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान को लेकर विवाद छिड़ गया है। भाजपा नेता बृज भूषण शरण सिंह ने उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उदयनिधि स्टालिन को रावण और हिरण्यकश्यप के वंशज बताते हुए सनातन धर्म की अस्मिता पर तीखा प्रहार किया।

    भाजपा नेता बृज भूषण शरण सिंह ने एक संवाददाता से बातचीत में कहा कि सनातन धर्म ही सत्य है और इसे कोई मिटा नहीं सकता। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म को हर युग में चुनौती मिली है, और आज भी कलियुग में यह चुनौती जारी है। यह संघर्ष अच्छी और बुरी शक्तियों के बीच सदियों पुराना रहा है। उदयनिधि स्टालिन जैसे लोग उस ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं जो इस धर्म को समाप्त करना चाहते हैं।”

    दरअसल, डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के पुत्र उदयनिधि स्टालिन ने हाल ही में यह बयान दिया था कि सनातन धर्म, जो समाज में भेदभाव फैलाता है, उसे समाप्त करना होगा। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में इसका तीव्र विरोध हुआ है।

    बृज भूषण ने पहलवान विनेश फोगाट के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे उन आरोपों से निपट रहे हैं जो विनेश फोगाट ने उन पर लगाए हैं। उन्होंने साफ किया कि उक्त मामले में अदालत में सुनवाई जारी है और कुश्ती से जुड़ी गतिविधियों को लेकर उनकी भूमिका स्पष्ट है।

    उन्होंने कहा कि वे भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं और इसी अनुभव के आधार पर कह सकते हैं कि संघ कभी किसी खिलाड़ी को खेलने से नहीं रोकता। यदि किसी को रोका गया है भी तो उसकी वजह अवश्य बताई गई होगी। यह विवाद वर्तमान में भारतीय कुश्ती संघ का विषय है और इसका उनके पदाधिकारियों के जरिए समाधान किया जाएगा।

    यह मामला न केवल तमिलनाडु की राजनीति में बल्कि केंद्र और देश की राजनीति में भी सुर्खियां बटोर रहा है। विरोध और समर्थन दोनों ओर से बयान आ रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सनातन धर्म जैसे विषयों पर बयानबाजी ने समाज में बहस को तेज कर दिया है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक मायने पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    वर्तमान परिदृश्य में सनातन धर्म, राजनीति और समाज के बीच जुड़ी इस बहस ने नया मोड़ ले लिया है, जहां नेताओं के बीच तीखी टिप्पणियों और नकारात्मक शब्दों का प्रयोग आम होता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि धर्म और राजनीति के बीच की दूरी कम होती जा रही है और हर कदम पर विचार-विमर्श की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।

    उदय निधि स्टालिन की टिप्पणी और बृज भूषण के जवाब से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक टकराव अब धर्म के मुद्दे पर भी गहरा गया है। इस बीच आम जनता में भी इस विषय को लेकर चर्चा बढ़ी है, जो राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक सामंजस्य के लिए एक चिंताजनक संकेत है।

    Source

    error: Content is protected !!