भोपाल। ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब और अधिक गंभीर रूप ले चुका है। परिवार के आग्रह और सामाजिक दबाव के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इस संदिग्ध मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की सिफारिश की है। यह निर्णय एक लंबी लड़ाई और कई सवालों के बाद आया है, जिनमें ट्विशा की मौत को केवल आत्महत्या नहीं माना जा रहा बल्कि इसके पीछे गुप्त मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना की आशंका जताई जा रही है।
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने रिटायर्ड सैनिकों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा था कि ट्विशा की मौत में सीधे-सीधे परिवार के बाहर दबाव और प्रताड़ना की बात सामने आ रही है। मुख्यमंत्री ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद सरकार ने औपचारिक रूप से सीबीआई जांच की सिफारिश भेजी, जिसे परिवार ने राहत की खबर के रूप में स्वीकारा है।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने भी इस मामले में सीबीआई जांच के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को स्वतः संज्ञान लेकर जांच सीबीआई को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की जांच व्यवस्था पर समाज में लगातार सवाल उठ रहे हैं और इस मामले में तेजी से न्याय मिलना आवश्यक है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब ट्विशा के परिवार के वकील आयुष तिवारी ने अदालत के सामने ट्विशा और उनकी सास गिरीबाला सिंह के बीच हुई कथित व्हाट्सएप चैट प्रस्तुत की। इन चैट्स से यह बात सामने आई कि ट्विशा को ससुराल में मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था। वकील ने न्यायालय से इन चैट्स को जांच में शामिल करने की अपील की ताकि पूरे सच की गहराई में जाना जा सके।
परिवार अब दोबारा पोस्टमार्टम कराने की भी तैयारी कर रहा है। उनका दावा है कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई पहलू अस्पष्ट हैं और निष्पक्ष जांच के लिए फॉरेंसिक और मेडिकल दोनों स्तर पर पुनः अध्ययन जरूरी है। वे हर संभव कानूनी कदम उठाकर न्याय चाहते हैं ताकि ट्विशा की मौत की गहनता से जांच हो सके।
ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत का परिवार ने विरोध किया है। साथ ही सास गिरीबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग भी उठाई गई है। वकील आयुष तिवारी ने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटे बाद इतनी तेज़ी से जमानत मिलना सहज नहीं दिखता और इससे जांच पर प्रभाव पड़ने का खतरा है।
ट्विशा के परिवार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विशेष याचिका भी दायर की है, जिस पर शीघ्र सुनवाई अपेक्षित है। अब सभी की निगाहें अदालत और सीबीआई जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। परिवार को उम्मीद है कि सीबीआई की निष्पक्ष जांच से तथ्य सामने आएंगे और न्याय व्यवस्था सही दिशा में कदम बढ़ाएगी। यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत की कहानी नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, न्यायपालिका की भूमिका और प्रभावशाली व्यक्तियों के दखल को लेकर भी समाज में कई बड़े सवाल उठा रहा है।

