महाराष्ट्र दिवस पर संयुक्त आंदोलन के शहीदों को मुख्यमंत्री फडणवीस की सादर श्रद्धांजलि

Rashtrabaan

    मुंबई। महाराष्ट्र दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हुतात्मा स्मारक पहुंचकर 1950 के दशक के संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और विकास की यात्रा पर प्रकाश डाला तथा राज्यवासियों को इस गर्व के दिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

    संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन एक अहम जन आंदोलन था, जिसे 1956 से 1960 के बीच मराठी भाषी लोगों के लिए एकीकृत महाराष्ट्र राज्य के गठन की मांग को लेकर जारी रखा गया। इस आंदोलन में शहीद हुए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों और युवा कार्यकर्ताओं ने अपने जीवन को न्योछावर कर यह सुनिश्चित किया कि मराठी भाषी जनता को एक साथ अपने सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए अधिकार प्राप्त हो।

    मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “महाराष्ट्र की स्थापना की कहानी केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उसने हमारे जनजीवन की धरोहर, भाषा और पहचान को संरक्षित किया। छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रेरणा से प्रेरित यह धरती सदैव प्रगति और समानता के मार्ग पर अग्रसर रही है। हमारा महाराष्ट्र अब देश का आर्थिक इंजन बन गया है, जो निरंतर विकास की ओर बढ़ रहा है।”

    उन्होंने आगे कहा कि यहां के श्रमिक, किसान, युवा और उद्योगपति सब मिलकर इस राज्य को सफलतापूर्वक आगे ले जा रहे हैं। “हमारे मजदूरों की कड़ी मेहनत और समर्पण के बिना यह संभव नहीं था,” सीएम ने कहा। इस अवसर पर उन्होंने श्रमिक दिवस की भी शुभकामनाएं दीं और सभी मजदूरों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

    सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया पर भी महाराष्ट्र दिवस की बधाई देते हुए लिखा, “हमारा महाराष्ट्र दूरदर्शी नेतृत्व और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ तेजी से विकसित हो रहा है। यह प्रदेश न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी एक मिसाल कायम कर रहा है।”

    वहीं, महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई के लोक भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर 67वें स्थापना दिवस का समारोह आयोजित किया। इस समारोह में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राज्य गीत गाए गए और सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी।

    राज्यपाल के साथ उनकी पत्नी, सचिवालय के अधिकारी, पुलिस तथा लोक भवन के कर्मचारी इस महत्वपूर्ण अवसर पर मौजूद रहे। इस दौरान जीवंत और हर्षोल्लास भरा माहौल देखने को मिला, जो महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं और राष्ट्रीयता की अभिव्यक्ति थी।

    महाराष्ट्र दिवस हर वर्ष 1 मई को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1960 में संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन की मांगें पूरी होकर महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ। यह दिन महाराष्ट्र की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और आर्थिक विकास का प्रतीक माना जाता है।

    यह दिवस न केवल एक सार्वजनिक अवकाश है, बल्कि महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए गर्व और ऐतिहासिक महत्व का दिन भी है, जो उन्हें अपने इतिहास की याद दिलाता है और भविष्य के लिए प्रेरित करता है।

    महाराष्ट्र का यह गौरवशाली इतिहास एवं विकास यात्रा आज भी राज्य की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार बना हुआ है, जिसके प्रति मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों ने अपने-अपने संबोधनों में जोर दिया।

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