तमिलनाडु की सांस्कृतिक नगरी चेन्नई में हाल ही में आयोजित हुई HCL कॉन्सर्ट सीरीज में युवा नृत्यांगना चित्रा लक्ष्मणन ने भरतनाट्यम के मार्गम (परंपरागत कथानक प्रदर्शन) के अनेक रोचक पहलुओं को बखूबी प्रस्तुत किया। श्रीकला भरत की शिष्या चित्रा ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भरतनाट्यम की गहराई और विविधता को दर्शकों के समक्ष जीवंत किया।
भरतनाट्यम दक्षिण भारत का एक प्राचीन और विश्वविख्यात शास्त्रीय नृत्य रूप है, जिसमें कथात्मक अभिव्यक्ति और शारीरिक मुद्राओं का मिश्रण होता है। इस नृत्य में मार्गम शब्द उन संरचित क्रमबद्ध कथानकों को संदर्भित करता है जिनके माध्यम से देवी-देवताओं की कथाएँ और विभिन्न भावनाएँ व्यक्त की जाती हैं। युवा चित्रा ने इस मार्गम के विभिन्न तत्वों जैसे कि आलापाद, वार्षिकी, जलसा, लावणी इत्यादि को अपनी प्रस्तुति में संगीतमय और नाटकीय अंदाज में पिरोया।
चीत्रा की प्रस्तुति में उनकी शिक्षा का प्रभाव स्पष्ट दिखा। श्रीकला भरत के निर्देशन में उन्होंने नृत्य की तकनीकी कुशलता के साथ-साथ भाव-भंगिमाओं का सजीव प्रयोग किया। उनकी हर मुद्रा, हर अभिव्यक्ति ठोस और प्रभावशाली थी, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। प्रदर्शन के दौरान उन्हें मिली प्रशंसा इस बात का प्रमाण थी कि उनका अध्ययन एवं अभ्यास कितना व्यापक और समर्पित रहा है।
इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण और प्रचार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। चित्रा लक्ष्मणन ने इस मंच से यह स्पष्ट कर दिया कि युवा पीढ़ी न केवल इस पारंपरिक कला को समझती है, बल्कि उसमें नवाचार और जीवंतता भी ला सकती है। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की मूलभूत परंपराओं के साथ-साथ इसकी समकालीन प्रासंगिकता से भी रूबरू कराया।
भरतनाट्यम मार्गम की यह प्रस्तुति नृत्य प्रेमियों और कला समीक्षकों दोनों के लिए एक यादगार अनुभव रही। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य न केवल इतिहास में बल्कि आज भी अपनी विविधताओं और सांस्कृतिक समृद्धि के कारण जीवंत और प्रासंगिक है। चित्रा लक्ष्मणन के कारनामे ने निश्चित रूप से भारतीय नृत्य रंगमंच को एक नई ऊर्जा और चमक प्रदान की है।

