कांग्रेस सरकार गठन को लेकर अंतिम समय में सलाह-मशवरे में दिख रही है सक्रिय

Rashtrabaan

    केरल में नई सरकार के गठन को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग गुटों के बीच राजनीतिक समीकरण जटिल होते जा रहे हैं, जिससे सरकार बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। खबरों के अनुसार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव और केरल प्रभारी दिपदास मुनसी ने मंत्रिमंडल गठन को लेकर अंतिम निर्णय के लिए गुट प्रमुखों को जल्द सर्वसम्मति तक पहुंचाने की कोशिश तेज कर दी है।

    राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को दोपहर 2 बजे तक मंत्रियों की अंतिम सूची सौंपने की अंतिम समय सीमा नजदीक है, जिसके मद्देनजर कांग्रेस के भीतर चल रही बातचीत बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। विभिन्न गुट अपनी-अपनी मांगों को लेकर मजबूत रुख अपनाए हुए हैं, जो सरकार गठन के रास्ते में चुनौतियां खड़ी कर रहा है।

    ज्ञात हो कि कांग्रेस के अंदर केरल इकाई में कई ऐसे गुट हैं, जिनके प्रतिनिधि मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं। इस राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने के लिए दिपदास मुनसी सतत संवाद कर रहे हैं और सभी पक्षों को शामिल करते हुए एक स्थायी समझौते पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि सरकार शीघ्र और सुचारू रूप से बन सके।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस अंतिम चरण में यदि कांग्रेस सफलतापूर्वक सभी गुटों के प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में स्थान देने का संतुलन बनाए रख पाई, तो सरकार गठन प्रक्रिया में विलंब नहीं होगा। वहीं, असहमति की स्थिति में राजनीतिक संकट गहरा सकता है और सरकार के गठन में दिक्कतें आ सकती हैं।

    कांग्रेस की यह कोशिश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केरल का राजनीतिक माहौल काफी संवेदनशील है और वहां सरकार बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना पार्टी की छवि के लिए आवश्यक है। दिपदास मुनसी के नेतृत्व में चल रही बातचीत इसीलिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अंततः, कांग्रेस की यह अंतिम समय की मशवरेबाज़ी यह संकेत देती है कि पार्टी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाना चाहती है और समय सीमा के भीतर सरकार को स्थिर रूप से स्थापित करना प्राथमिकता बना रही है। इसके साथ ही पार्टी यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी गुट इस प्रक्रिया से बाहर न रह जाए और सभी की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।

    इस स्थिति में अब जनता की नज़रें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस कितनी कुशलता से अपने अंदर के मतभेदों को सुलझा पाती है और केरल में एक शक्तिशाली और प्रभावशाली सरकार बनाने में सफल होती है।

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