लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में बलिया जिले में तैनात खंड विकास अधिकारी श्रवण प्रसाद गुप्ता को महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए लैंगिक उत्पीड़न के आरोपों के आधार पर निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सरकार की महिला सुरक्षा के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
बलिया की जिलाधिकारी की ओर से गठित स्थानीय परिवाद समिति ने मामले की जांच की थी, जिसमें उक्त अधिकारी पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि अधिकारी ने कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों का हनन किया है जो ‘‘महिला यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम-2013’’ के नियमों का उल्लंघन है। यह मामला उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 के भी विरोध में है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि प्रदेश सरकार महिलाओं के प्रति सभी स्तरों पर बढ़ती संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है और किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे संरक्षण, पारदर्शिता, और जवाबदेही के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता को पूरी तरह रोकने की पहल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि जांच में किसी भी सरकारी कर्मचारी को दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त एवं अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
शासन द्वारा निलंबित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित है ताकि इस तरह के मामलों को दोबारा अंजाम न मिले। उन्होनें स्पष्ट किया कि महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजन्य कार्यस्थल उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है और इसके लिए सभी विभागों को सख्ती से निर्देश दिए जा रहे हैं।
सरकार ने इस मामले में अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार सुशासन, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक शुचिता को सर्वोच्च महत्व दे रही है। किसी भी अनुचित आचरण की रक्षा या संरक्षण नहीं किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश के सरकारी विभागों में महिलाओं की स्थिति सुधारने की उम्मीद की जा रही है, जिससे वे बिना भय और उत्पीड़न के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।

