रोजगार पर एआई के प्रभाव को कम करने के लिए ILO ने दी जीवन भर सीखने की रणनीतिक पहल

Rashtrabaan

    अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने सरकारों से आग्रह किया है कि वे जीवन भर सीखने को अपनी नीतियों में प्राथमिकता दें ताकि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में रोजगार पर नवीनतम चुनौतियों का सामना किया जा सके। एक हालिया अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि पिछले वर्ष केवल 16% कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का संरचित प्रशिक्षण मिला है, जो कार्यबल में असमानता और शिक्षा के अवसरों की कमी को दर्शाता है।

    ILO ने कहा है कि तकनीकी प्रगति और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में जीवन भर सीखने को एक रणनीतिक नीति बनाना आवश्यक है ताकि कामगार न केवल अपनी मौजूदा नौकरी में बने रहें बल्कि नए कौशल भी हासिल कर सकें।

    अध्ययन से पता चला है कि अधिकांश श्रमिकों को आवश्यक प्रशिक्षण तक समान पहुंच नहीं मिल पा रही है, जो क्षेत्रीय, सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को और गहरा रही है। युवा और अनुभवी कर्मचारियों के बीच प्रशिक्षण के अवसरों में भी बड़ा अंतर पाया गया है।

    ILO ने सरकारों को सुझाव दिया है कि वे जरूरी संसाधन और समर्थन प्रदान करें ताकि सभी कार्यबल के वर्गों को डिजिटल और तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण मिल सके। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।

    यह संगठन मानता है कि जीवन भर सीखने का माहौल तैयार करने से न केवल रोजगार सुरक्षित होंगे, बल्कि उद्योग और अर्थव्यवस्था भी प्रगति करेंगे। ऐसा होने पर श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ेगी और आर्थिक असमानताएं कम होंगी।

    सरकारों और नीतिनिर्माताओं के लिए यह एक चुनौती और अवसर दोनों है कि वे बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली को पुनः संरचित करें। ILO की यह रिपोर्ट इस बदलाव की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।

    इस दिशा में कई देशों ने पहले से ही प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर और अधिक समर्पित रणनीतियों की जरूरत है, ताकि हर श्रमिक तकनीकी परिवर्तन के साथ आगे बढ़ सके। शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना अब समय की प्राथमिकता बन गया है।

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