भारतीय पनीर, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर का कालारी पनीर, अब विश्व के मानचित्र पर अपनी एक खास पहचान बना रहा है। इस पनीर को जागरूकता मिली है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसा पात्र भाषण के बाद, जिन्होंने इसे “कश्मीर का मोज़रेला” बताते हुए इसकी विशेषता पर ज़ोर दिया। यह अनोखा पनीर गुज्जर-बकरवाल समुदाय द्वारा पीढ़ियों से बनता आ रहा है, जो इसकी पारंपरिक विधि पर गर्व महसूस करता है।
कालारी पनीर एक ऐसे क्षेत्रीय व्यंजन के रूप में उभर रहा है जिसने भारतीय खाद्य संस्कृति को समृद्ध करने में अपना योगदान दिया है। यह पनीर अपनी बनावट और स्वाद के कारण अलग पहचाना जाता है, जिसे स्थानीय गहरे संसाधनों से तैयार किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह के पारंपरिक संसाधनों को वैश्विक मंच पर लाना भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने का एक अहम जरिया है।
गुज्जर-बकरवाल समुदाय, जो मुख्य रूप से पशुपालन में संलग्न है, ने इस पनीर को बनाने के लिए अपनी पारंपरिक विधि बनाए रखी है। उनकी मेहनत और समर्पण की वजह से ही यह पनीर इतना खास माना जाता है। कालारी पनीर को ‘‘मोज़रेला ऑफ कश्मीर’’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी बनावट और स्वाद में मोज़रेला पनीर की तरह ही एक खासियत होती है, लेकिन इसके भीतर कश्मीर की मिट्टी और जलवायु का अनूठा प्रभाव भी झलकता है।
इस पनीर के वैश्विक स्तर पर पहचान पाने से न सिर्फ स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार को भी एक नई दिशा मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को अधिक लोगों तक पहुंचाना और भारतीय उत्पत्ति वाले उत्पादों के निर्यात में वृद्धि करना है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इस प्रकार, कालारी पनीर भारतीय पनीर उद्योग के लिए एक चमकता सितारा बनकर उभरा है। यह न केवल स्वाद में अनूठा है, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक है जो भारत के विविधतापूर्ण खानपान को दर्शाता है। प्रधानमंत्री की इस प्रशंसा ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाई है, जो आने वाले समय में भारतीय पनीर उद्योग के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

