ईरान के सर्वोच्च नेता ने एक बार फिर अपने देश की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं की सुरक्षा का संकल्प व्यक्त किया है। हाल ही में जारी अपनी गतिविधियों के दौरान, उन्होंने स्पष्ट किया कि ये क्षमताएँ देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के आधारभूत स्तम्भ हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें कमजोर या प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने अमेरिकी बलों को फारस की खाड़ी में गैरजरूरी और अस्थायी बताया और कहा कि “अमेरिकियों का इस खाड़ी में एकमात्र उचित स्थान इसके पानी के नीचे है।” इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि टेहरान की नीति फारस की खाड़ी और होर्मुज जलसंधि पर उसकी पकड़ बनाए रखने की रही है, जो क्षेत्रीय तनाव का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
होर्मुज जलसंधि एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से विश्व के तेल भंडार का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। टेहरान की ओर से इस जलसंधि को नियंत्रित करने की बात ने क्षेत्रीय देशों और वैश्विक समुदाय में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ावा दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता का यह बयान उसी संदर्भ में सामने आया है, जिसमें उन्होंने क्षेत्र में विदेशी किसी भी हस्तक्षेप को स्वीकार्य नहीं माना।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ईरान की इस कड़ी प्रतिक्रिया के पीछे अमेरिकी और पश्चिमी देशों द्वारा उसके परमाणु कार्यक्रम पर लगाई गई रोकथाम और आर्थिक प्रतिबंध प्रमुख कारण हैं। ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं को भी न केवल रक्षा बल्कि रणनीतिक साधन के रूप में विकसित कर रहा है। इससे क्षेत्रीय संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और तनाव स्थिति को भी बढ़ावा मिलता है।
ईरान सरकार का मानना है कि उसकी परमाणु और मिसाइल क्षमताएँ पूर्णत: शांति और सुरक्षा के लिए हैं, जो किसी भी बाहरी धमकी से निपटने हेतु आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी अपने हठ छोड़कर उचित संवाद और शांति की दिशा में कदम बढ़ाएंगे, तो क्षेत्र में स्थिर सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
परंतु वर्तमान हालात में टेहरान अपने रुख पर मजबूती से खड़ा है और पुरानी रणनीतियों के अनुरूप अपनी सैन्य तथा परमाणु ताकत को लगातार सुदृढ़ कर रहा है। ऐसे में फारस की खाड़ी क्षेत्र में संकट और अनिश्चितता भी बनी हुई है। दुनिया की नजरें अब ईरान की भविष्य की नीतियों पर टिकी हैं, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

