मुंबई में बीएमसी में जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने इस मामले को लेकर बीएमसी के मेयर ऋतु तावड़े और कमिश्नर अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर तुरंत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
अमित साटम ने अपने पत्र में कहा है कि बीएमसी की आंतरिक जांच में 87,000 से अधिक जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड में गड़बड़ियां पाई गई हैं। कुछ रिकॉर्ड अनिवार्य सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरसी) के बजाय एसएपी पोर्टल पर दर्ज थे, जिनकी प्रामाणिकता फिलहाल जांच का विषय है। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन फर्जी एंट्रीज ने सिस्टम के प्रभाव और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है।
पत्र में साटम ने अपील की है कि सभी नकली रजिस्ट्रेशनों को वार्डवार अलग किया जाए और संबंधित मेडिकल हेल्थ अधिकारियों (एमएचओ) की पहचान कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। इसके अतिरिक्त, दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने इस मामले को गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में भी देखा है, क्योंकि नकली जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र मिलने से घुसपैठियों को सरकारी सिस्टम में दाखिला मिल सकता है जिससे शहर की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सुरक्षा की बड़ी अनदेखी है।”
बीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 से 2026 के बीच एसएपी सिस्टम के माध्यम से 87,000 से अधिक सुधार किए गए, जबकि सीआरएस पर मात्र 33,772 एंट्री दर्ज हुई। जांच में यह भी पाया गया कि कई वार्डों के एमएचओ ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पुराने एसएपी-सीपीडब्ल्यूएम सिस्टम पर भी अनाधिकृत बदलाव किए थे।
अमित साटम ने जोर दिया कि इस मामले की पूरी पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा घोटाला दोबारा न हो। उन्होंने बीएमसी प्रशासन से तुरंत प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया है ताकि जनता का विश्वास बहाल किया जा सके और मुंबई की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस विवाद ने न केवल बीएमसी के रिकॉर्ड रखरखाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं बल्कि स्थानीय प्रशासन और राजनैतिक दलों के लिए भी एक बड़ा चुनौती प्रस्तुत किया है। भाजपाने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीर्ष अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। वहीं, बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा। विपक्षी दलों ने भी इस घोटाले पर प्रतिक्रिया जताई और बीएमसी से जवाब मांगा है।
यह मामला मुंबई जैसे महानगर में प्रशासनिक जवाबदेही और विश्वसनीयता की अहमियत को दर्शाता है, साथ ही सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिहाज से भी इसको गंभीरता से लेने की जरूरत है।

