लखनऊ। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने दक्षिण दिल्ली से एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो सोशल मीडिया पर अमेरिका और ब्रिटेन की महिलाओं के नाम की फर्जी आईडी बनाकर भारतीय पुरुषों को ठगता था। आरोपी के कब्जे से तीन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
पुलिस ने आरोपी की पहचान उचनेवा के रूप में की है, जो मूल रूप से नाइजीरिया का निवासी है। वह लंबे समय से इस तरह के अपराधों में संलिप्त था। जांच में पता चला है कि उसने फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर कई लोगों से ठगी की है। गिरफ्तार आरोपी को दक्षिण दिल्ली से पकड़कर लखनऊ के दरियागंज थाने में रखा गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया पर अमेरिका और ब्रिटेन की महिलाओं के नाम से नकली अकाउंट बनाता था। इसके बाद वे भारतीय पुरुषों से संपर्क करते और उनकी भावनाओं को लुभाने का प्रयास करता था। जब कोई व्यक्ति इसके जाल में फंस जाता, तो आरोपी उसे यह विश्वास दिलाता कि वह भारत आकर उनसे मुलाकात करेगा। मुलाकात से पहले वह उनसे पैसे और उपहार मांगता, जिसका बहाना बताता कि भारत आने में यही लगाने होंगे।
इस पूरे जाल के माध्यम से आरोपी खासकर भारतीय पुरुषों को निशाना बनाता था। अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूरी तथ्य जांच में जुट गई है।
अपराधी 2010 में भारत में कपड़े के व्यापार के उद्देश्य से आया था। व्यापार में अपेक्षित लाभ न मिलने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस धंधे का सहारा लिया। उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन की महिलाओं की फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय पुरुषों को ठगने की योजना बनाई।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके कुछ साथी भी सोशल मीडिया पर इस प्रकार के फर्जी अकाउंट बना कर भारतियों से पैसे ऐंठते हैं। उसने यह भी खुलासा किया कि 2020 में मध्य प्रदेश पुलिस ने इसी मामले में उसे गिरफ्तार किया था, जिसमें वह चार वर्ष जेल में रह चुका है।
हालांकि इसके बाद आरोपी और उसके साथियों ने लखनऊ के एक युवक को निशाना बनाकर फिर धन एंठने के लिए योजना बनाई, जिससे पुलिस का पर्दाफाश हुआ।
लखनऊ मामले में आरोपी और उसके साथियों ने ‘विलियम डेविस’ नाम के फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से युवक से दोस्ती की तथा उसे प्रेम जाल में फंसाया। सितंबर 2025 में युवक को बताया गया कि विलियम डेविस आपके लिए तीन करोड़ पाउंड लेकर आई है, लेकिन यह राशि पाने के लिए पहले 61,500 रुपए जमा करने होंगे।
फिर बहाने बनाकर युवक से कुल 28 लाख रुपए की ठगी की गई, परंतु युवक को एक भी रुपया वापस नहीं मिला। जनवरी 2026 तक यह ठगी चलती रही जब युवक ने लखनऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया है और अब वे इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता भी खोज रहे हैं। यह मामला साइबर अपराध की जटिलताओं को दर्शाता है और सोशल मीडिया पर सावधानी बरतने की जरूरत को रेखांकित करता है।

