राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) मुंबई चैप्टर द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जनसंपर्क की बढ़ती भूमिका को लेकर जोरदार चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई कि सूचना के इस युग में जनसंपर्क सिर्फ कॉर्पोरेट संचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने वाला ‘‘पांचवां स्तंभ’’ बन चुका है। कार्यक्रम में लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिक संवाद की अनिवार्यता पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय संचार क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी को सशक्त करना था। कार्यक्रम में जनसंपर्क के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और भावी संचारक एक मंच पर आए और उन्होंने इस क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि संस्थाओं और नागरिकों के बीच पारदर्शिता, विश्वास और जवाबदेही को मजबूत करने में जनसंपर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ डॉ. निलेश खरे, जो साम टीव्ही के एडिटर-इन-चीफ एवं सीओओ हैं, तथा डॉ. संजय रानडे ने चर्चा में कहा कि आज के दौर में, जब फेक न्यूज का खतरा व्याप्त है, जनसंपर्क पेशेवरों को सत्य और विश्वसनीयता के संरक्षक के रूप में काम करना चाहिए, ताकि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बना रहे।
कार्यक्रम में जय हिंद कॉलेज, देविप्रसाद गोएंका मैनेजमेंट कॉलेज ऑफ मीडिया स्टडीज और मुंबई विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। ओपन फोरम में विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों ने बहस को और अधिक जीवंत और जानदार बनाया। खास तौर पर जय हिंद कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन को आकर्षक बनाया। इस मौके पर एफपीजे ग्रुप के निदेशक अभिषेक कर्नानी भी उपस्थित थे।
पीआरएसआई मुंबई चैप्टर की अध्यक्ष अनीता श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा, “लोकतंत्र की मजबूती के लिए सिर्फ युवाओं की आवाज सुनना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करने के लिए तैयार करना भी जरूरी है।”
कार्यक्रम में पीआरएसआई मुंबई चैप्टर के सचिव डॉ. मिलिंद आवताडे, सहसचिव प्रा. दैवता पाटिल, कोषाध्यक्ष अमलान मस्कारेन्हास के साथ ही जेनेट अरोले, ब्रज किशोर, सुहास नाइक और उपाध्यक्ष राजेश परिदा भी मौजूद थे। यह आयोजन जनसंपर्क की भूमिका को लोकतांत्रिक संरचना में सशक्त बनाने और युवाओं को जिम्मेदार संवाद के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

