पंजाब पुलिस ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया है कि वे डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ की ओटीटी रिलीज़ पर तुरंत प्रतिबंध लगाए। पुलिस का आरोप है कि यह फिल्म अपराध को बढ़ावा देती है और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
पुलिस ने अपनी शिकायत में बताया कि ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ फिल्म पंजाब में चल रहे कुछ अपराधों को रोचक और ग्लैमराइज़ कर दिखाती है, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है। इसके अलावा, इस तरह की फिल्मों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर असीमित पहुंच होने के कारण युवाओं में ऐसे विचारों का फैलाव बढ़ रहा है।
पंजाब पुलिस ने इसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय से फिल्म पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने ZEE5 से इस डॉक्यूमेंट्री का ट्रेलर वैश्विक स्तर पर हटा देने को भी कहा है।
झुकाव के बाद, केंद्र सरकार की तरफ से अभी इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। इस बीच कंटेंट की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं और यह चर्चा चल रही है कि किस हद तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित सामग्री की निगरानी होनी चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, वहीं किसी भी कंटेंट को समाजिक जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना भी आवश्यक है ताकि युवा पीढ़ी प्रभावित न हो।
पंजाब पुलिस का यह कदम इस बात को मजबूती देता है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते डिजिटल कंटेंट पर नियंत्रण और समीक्षा की जरूरत है, ताकि कोई भी ऐसा कंटेंट सार्वजनिक न हो जो समाज में अपराध को बढ़ावा दे या अशांति फैला सके।
सूचना मंत्रालय से भी उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करेंगे और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियम बनाएंगे, जिससे भविष्य में इस तरह की विवादास्पद सामग्री पर लगाम लग सके।
इस मामले से डिजिटल मीडिया में कंटेंट मॉडरेशन और सेंसॉरशिप की बहस फिर से जोर पकड़ने लगी है, क्योंकि दर्शकों की पहुंच और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सही दिशा में कदम उठाना जरूरी है।

