अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक अनोखा और प्रतिभाशाली रिकॉर्ड स्थापित किया गया है, जिसमें चौदह लोगों ने मिलकर 22.3 मीटर लंबा पानी के नीचे मानव स्टैक बनाया। इस अविश्वसनीय आयोजन में उप राज्यपाल डी.के. जोशी भी शामिल हुए। सभी प्रतिभागी इस स्टैक में तीन मिनट तक पानी के अंदर बने रहे, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सहनशीलता का परिचायक है।
इस रिकॉर्ड को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है, जिससे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम विश्व स्तर पर चमक उठा है। यह उपलब्धि न केवल साहस और टीम वर्क की मिसाल है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे समर्पित प्रयास और अनुशासन से असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं।
इस आयोजन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की ओर ध्यान दें तो यह पहले से आयोजित प्रशिक्षण शिविरों और सुरक्षा उपायों के तहत किया गया था। टीम के सदस्यों ने विविध तकनीकों के माध्यम से सांस नियंत्रण का अभ्यास किया और समेकित तैयारी के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने जलके नीचे लंबे समय तक स्थिर रहने की कला को आत्मसात किया। इस प्रकार का मानव स्टैक बनाना सहज नहीं होता, इसमें सबके बीच तालमेल, अपेक्षित स्थिरता एवं साँस पर नियंत्रण बेहद आवश्यक होता है।
उप राज्यपाल डी.के. जोशी ने इस आयोजन को सफल बनाने में जुड़े सभी प्रतिभागियों और आयोजकों की प्रशंसा की। उनका मानना था कि इस प्रकार की उपलब्धि से क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को बल मिलता है, साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बन सकती है।
अंडमान और निकोबार द्वीपों के प्रशासन द्वारा बताया गया है कि यह केवल एक रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय प्रतिभा के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में ऐसे और आयोजन करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे युवा उत्साह और खेल के माध्यम से सामाजिक संलग्नता को बढ़ावा मिल सके।
यह उपलब्धि क्षेत्रीय मीडिया और राष्ट्रीय स्तर पर भारी चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों ने इसे टीम स्पिरिट, तकनीकी दक्षता और शारीरिक क्षमताओं के अनूठे मेल के रूप में परिभाषित किया है।
इस तरह के रिकॉर्ड न केवल प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनते हैं, बल्कि अन्य समुदायों को भी अपनी सीमाओं को पहचानने और उन्हें चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अंडमान की यह कहानी दृढ़ निश्चय का सबूत है कि मजबूत इरादों और सामूहिक प्रयासों से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
अंत में, यह भी गौर करने योग्य है कि इस सफलता के बाद अंडमान को दो दिनों के अंदर दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का गौरव प्राप्त हुआ, जो क्षेत्र की सामर्थ्य और प्रतिभाओं की झलक है। इस परंपरा की निरंतरता से अंडमान और निकोबार का नाम विश्व मानचित्र पर और भी ऊंचा होगा।

