‘अनचुज़न’ सीरीज़ समीक्षा: आसा बटरफील्ड फंसे हैं धीमी गति वाले संस्कृतिप्रधान थ्रिलर में

Rashtrabaan

    नयी वेब सीरीज़ ‘अनचुज़न’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता थी, खासकर जब इसकी भूमिका निभा रहे आसा बटरफील्ड जैसे उभरते हुए कलाकार का नाम सामने आया। हालांकि, इस श्रृंखला में भले ही कलाकारों ने अपना पूरा योग दिया हो, लेकिन कथानक और निर्देशन के मामले में यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई।

    ‘अनचुज़न’ को एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर के तौर पर प्रस्तुत किया गया है, जिसमें रहस्य और सनसनी पैदा करने की कोशिश की गई है। लेकिन यह थ्रिलर धीरे-धीरे खींचने वाली कहानी और अवास्तविक घटनाक्रमों के कारण अपनी चमक खो देता है। श्रोता या दर्शक धीरे-धीरे इसे बोझिल और उबाऊ अनुभव कर सकते हैं।

    कहानी का मुख्य केन्द्र बिंदु एक ऐसे समूह या कल्ट (संस्कृति) के इर्द-गिर्द घूमता है, जहां मुख्य पात्र फंसा हुआ नजर आता है। आसा बटरफील्ड ने इस भूमिका में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, लेकिन पटकथा और संवादों की कमजोरी के कारण उनकी क्षमता पूरी तरह सामने नहीं आ पाती। कई बार ऐसा लगता है कि कहानी बनने के बजाय कई बार बस टिकी हुई है, और घटनाएं बिना किसी ठोस मकसद के हो रही हैं।

    निर्देशकों ने मनोवैज्ञानिक थ्रिलर के तत्वों को तो अपनाने की कोशिश की है, परंतु कहानी में समझदारी और सामंजस्य की कमी इसे गंभीरता से देखने वाले दर्शकों के लिए निराशाजनक बनाती है। इसके अलावा, अंत ऐसा लगता है जैसे बिना सोचे-समझे और जल्दबाजी में लिखा गया हो, जो कहानी को बेकार और बेवजह लंबा खींच देता है।

    कुल मिलाकर, ‘अनचुज़न’ वेब सीरीज़ को एक अच्छी मौलिक सोच और उत्कृष्ट अभिनय के बावजूद निर्देशन और पटकथा की कमियों के कारण वह सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद थी। यह सीरीज़ उन दर्शकों के लिए हो सकती है जो धीमे-धीमे खुलने वाली थ्रिलर पसंद करते हैं, परंतु जो तेजी, सस्पेंस और प्रभावशाली नैरेटिव की तलाश में हैं, उनके लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

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