प्रो-टेम स्पीकर की भूमिका विधानसभा के विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है। नई विधानसभा के गठन के समय, जब स्थायी स्पीकर का चयन अभी नहीं हुआ होता, तब प्रो-टेम स्पीकर कार्यभार संभालता है। उनकी जिम्मेदारी सदन की पहली बैठक को संचालित करना और नए सदस्यों को शपथ दिलाना होती है।
यह पद आमतौर पर अनुभवी और सम्मानित विधानसभासद को दिया जाता है, जो सदन के कामकाज की बारीकियों से परिचित होता है। प्रो-टेम स्पीकर सदन को स्थायी स्पीकर के चुनाव तक सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके कार्यकाल में सदन की बैठकों का संचालन, नियमों का पालन कराना और सदस्यों का समुचित आचरण सुनिश्चित करना शामिल होता है।
यह स्थिति इसलिए भी अहम होती है क्योंकि नई विधानसभा का यह पहला सत्र विधायी प्रक्रिया की नींव रखता है। इसके बिना सदन के कामकाज की शुरुआत संभव नहीं हो पाती। प्रो-टेम स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष और पारदर्शी संसदीय परंपराओं के आधार पर सदन के उचित संचालन को सुनिश्चित करना है।
संक्षेप में, प्रो-टेम स्पीकर नई विधानसभा के स्थायी स्पीकर के चुनाव तक के दौरान एक सेतु की तरह कार्य करता है, जिससे विधायी प्रक्रिया बाधारहित बनी रहती है। उनकी गतिविधियां विधानसभा के लोकतांत्रिक संचालन की सफलता के लिए मूलभूत होती हैं। इसलिए इस भूमिका को विधानसभा के प्रारंभिक चरण में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

