इफ्तार से मोहब्बत पर तिलक से नफरत क्यों? लेंसकार्ट विवाद में बीजेपी की नाज़िया खान का बड़ा बयान

Rashtrabaan

    देश की मशहूर आईवियर कंपनी लेंसकार्ट इन दिनों एक संवेदनशील विवाद में उलझी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब कंपनी ने अपने कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों जैसे कि तिलक और कलावा के इस्तेमाल पर नई गाइडलाइन जारी की। यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप ले चुका है और पूरे देश में इसकी चर्चा हो रही है।

    लेंसकार्ट के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर कंपनी का बहिष्कार करने की तेज मांग उठी। साथ ही, कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। दबाव बढ़ने के बाद कंपनी ने भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफी भी मांगी, लेकिन विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। बीजेपी के माइनॉरिटी मोर्चा की नेत्री नाज़िया इलाही ख़ान ने इस विवाद पर अपने विचार रखे और लेंसकार्ट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।

    तिलक और कलावे से असहमति पर बोला बीजेपी मोर्चा

    नाज़िया खान ने सवाल उठाया कि हिंदू कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाने और हाथ में कलावा बांधने से कंपनी को क्या परेशानी हो सकती है, खासकर जब हिजाब और सिख पगड़ी की उपस्थिति को लेकर कोई विवाद नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि लेंसकार्ट के शोरूम में इफ्तार पार्टियां आयोजित की जाती हैं और नमाज पढ़ी जाती है, तो फिर तिलक और कलावा पर होता क्यों है प्रतिबंध? नाज़िया ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने हिंदू कर्मचारियों को तिलक लगाने की सलाह दी तो उन्हें पाकिस्तान से धमकियां मिलने लगीं।

    मुनाफे और पदोन्नति में धार्मिक भेदभाव का आरोप

    महाराष्ट्र के अंधेरी क्षेत्र में लेंसकार्ट की 12-13 दुकानों में करीब 70 प्रतिशत मैनेजर मुस्लिम बताए जाते हैं, जबकि अधिक योग्य और शिक्षित हिंदू कर्मचारियों को मैनेजर पद से वंचित रखा जा रहा है। नाज़िया खान का आरोप है कि यह कंपनी की पक्षपातपूर्ण नीति का प्रतीक है, जहां कम पढ़े-लिखे मुस्लिम कर्मचारियों को मैनेजर पद मिलने लगे हैं।

    सीईओ पीयूष बंसल और उनकी पत्नी पर सवाल

    नाज़िया खान ने लेंसकार्ट के प्रमुख और सीईओ पीयूष बंसल एवं उनकी पत्नी निधि मित्तल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस से इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि विवाद बढ़ने और कंपनी के शेयर गिरने के बाद ही माफी मांगी गई, जबकि पहले इन सवालों को नजरअंदाज किया गया। नाज़िया ने यह भी जोड़ा कि निधि मित्तल सोशल मीडिया पर ‘Free Palestine’ मुहिम चला रही थीं और विवाद के बाद उन्होंने अपने अकाउंट हटा दिए।

    नौकरियों में धार्मिक आधार पर भेदभाव की मांग

    बीजेपी नेत्री ने धर्मांतरण के कथित मामलों का जिक्र करते हुए मुसलमानों को सरकारी और निजी नौकरियों से दूर रखने की मांग की है। उनका दावा है कि यह साजिशें ‘दावत-ए-इस्लाम’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ के तहत की जा रही हैं, जिन्हें रोकने के लिए 2-3 वर्षों तक मुसलमानों का रोजगार में बहिष्कार आवश्यक है। यह मांग विवादित है और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकती है।

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