जॉन स्टेफेनियुक, जोरेथम निर्देशक, ने हाल ही में अपनी अविस्मरणीय प्रस्तुत ‘विकेड’ के पुनःआवरण के बारे में खुलकर बात की। इस म्यूजिकल को न केवल एक दृश्यात्मक चमत्कार माना जा रहा है, बल्कि यह आज के दर्शकों की संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों से गहराई से जुड़ा हुआ भी है। निर्देशक का कहना है कि ये प्रस्तुति सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक दोस्ती और समझ का प्रतीक है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को जोड़ती है।
उन्होंने बताया कि इस ‘विकेड’ में उन्होंने स्क्रीन और रंगमंच की परंपरागत सीमाओं को तोड़ते हुए, नए तकनीकी और कलात्मक पहलुओं को जोड़ा है, जिससे यह नाटकीयता और प्रभाव में कहीं अधिक समृद्ध हो गई है। विजुअल स्पेक्ट्रम और कहानी दोनों में विविधता के कारण यह नाटक दर्शकों को पूरी तरह से बांधे रखता है।
जॉन ने कहा, “आज की संस्कृति में जहां ‘कैंसल कल्चर’ की बड़ी भूमिका है, इस म्यूजिकल ने इसका सामना करते हुए समाज के विविध पहलुओं को उजागर करने की कोशिश की है। हमने दर्शाया है कि रायभेद और पूर्वधारणा से ऊपर उठकर, एक दूसरे की पहचान का सम्मान करना कितना आवश्यक है।”
उनके अनुसार ‘विकेड’ सिर्फ एक जादुई कहानी नहीं है, बल्कि यह आज के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश पर एक बारीक नजर है। इन्हीं कारणों से यह नया रूपांतरण दर्शकों के साथ एक गहरी आत्मीयता स्थापित करता है जो पुरानी पसंदियों के साथ नई पीढ़ी को भी आकर्षित करता है।
इसके अतिरिक्त, जॉन ने इस म्यूजिकल की टीम वर्क की भी प्रशंसा की, जिससे यह साबित होता है कि एक अच्छी दोस्ती और सहभागी भावना ही किसी भी कलात्मक प्रोजेक्ट की सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा, “नाटक के हर कलाकार और तकनीशियन ने अपनी प्रतिबद्धता के साथ इस प्रस्तुति को खास बनाया है।”
अंत में, जॉन स्टेफेनियुक का मानना है कि इस ‘विकेड’ को मुंबई में प्रस्तुत करना विशेष रूप से उत्साहजनक है क्योंकि यह महानगर न केवल सांस्कृतिक मिलन स्थल है, बल्कि यहां के दर्शक नए और चुनौतीपूर्ण विषयों के लिए हमेशा खुले रहते हैं।
यह पुनःआवृत्ति दर्शाती है कि कला और संस्कृति के जरिए आज की पीढ़ी से संवाद करना और उनके सवालों का जवाब देना कितना महत्वपूर्ण है। फिल्म या थिएटर की सीमाओं से परे, ‘विकेड’ एक सामाजिक संदेशवाहक भी बनकर उभरा है।

