अमरावती। आंध्र प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने पूरी पारदर्शिता की मांग की है। पार्टी के महासचिव और एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को पत्र लिखकर राजनीतिक दलों को बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की पूरी सूची और मतदाता डेटा डिजिटल और खोजने योग्य प्रारूप में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
अप्पी रेड्डी ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र-वार और बूथ-वार मतदाता सूचियों के साथ बीएलओ के नाम, मतदान केंद्र या भाग संख्या, पदनाम और संपर्क जानकारी जैसे महत्वपूर्ण विवरण भी साझा करना आवश्यक है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, समन्वय और जवाबदेही में सुधार होगा, खासकर मतदाता सूची संशोधन, दावे, आपत्तियां, नाम जोड़ने-हटाने और प्रवासन सत्यापन के दौरान।
उन्होंने मतदाताओं के अवैध विलोपन, डुप्लीकेट प्रविष्टि और मतदाता स्थानांतरण को लेकर गहरी चिंता जताई है। अप्पी रेड्डी ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं पर भी स्पष्टता मांगी, ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता को बिना उचित प्रक्रिया के मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए।
सीईओ को भेजे गये तीन पत्रों में से एक में उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित मतदाता सूची डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है। इस सूची में किये जाने वाले सभी संशोधन, जैसे नाम जोड़ना या हटाना, पूर्ण निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से किये जाएं।
दूसरे पत्र में वाईएसआरसीपी ने राजनीतिक दलों के लिए बीएलओ का निर्वाचन क्षेत्र-वार विवरण मांगते हुए इसकी अहमियत चुनाव प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी और पारदर्शिता से जोड़ी। इसका उद्देश्य मतदान केंद्रों पर उचित निगरानी और समन्वय सुनिश्चित करना है।
तीसरे पत्र में अप्पी रेड्डी ने सीईओ से अनुरोध किया कि निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को निर्देशित करें कि वे पार्टी द्वारा बूथ स्तर के एजेंटों की नियुक्ति के लिए प्रस्तुत फॉर्म आईडी: बीएलए-2 को मान्यता दें। इससे बूथ स्तर पर बेहतर नियंत्रण और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
इस पूरी प्रक्रिया में वाईएसआर कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, चुनावी निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर दिया कि चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसमे पारदर्शिता और निष्पक्षता का होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सभी मतदाता बिना किसी भय या दबाव के अपने मत का प्रयोग कर सकें।
इस मांग के बाद से राजनीतिक और चुनाव आयोगों की ओर से इस विषय पर प्रतिक्रिया का इंतज़ार किया जा रहा है, जिससे आंध्र प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के प्रबंधन में सुधार हो सके।

