प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुम्नाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक हस्ताक्षरित लेख में मंदिर की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाने वाले वीरों के संघर्ष और बलिदानों को हमेशा याद रखने की बात कही है। गुजरात में स्थित यह मंदिर भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक रहा है, जिसे समय-समय पर पुनर्निर्मित किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में बताया कि सुम्नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि भारतीय इतिहास और परंपरा की पहचान है। जिन लोगों ने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उनके बलिदान को भूलना संभव नहीं है। यह उनको श्रद्धांजलि देने का भी अवसर है जिन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण में अपना योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि सुम्नाथ मंदिर का पुनः उद्घाटन स्वतंत्र भारत के निर्माण के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। यह न केवल हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को सहेजता है, बल्कि भारतीय जनमानस की अदम्य इच्छाशक्ति और आत्मा को भी दर्शाता है। मोदी ने विश्वास जताया कि मंदिर के संरक्षण और उसकी अहमियत को आने वाली पीढ़ियाँ भी समझेंगी और इसका सम्मान करेंगी।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लोगों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा और संवर्धन में अपना योगदान दें। सुम्नाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी संघर्षों और दृढ़ निश्चय की मिशाल है, जिसने पूरे राष्ट्र को गर्व महसूस कराया है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र रहा है, जो भारत की एकता और सहिष्णुता का सशक्त प्रतीक है।
इस दिन उन्होंने यह भी इंगित किया कि मंदिर की रक्षा और पुनर्निर्माण के प्रयासों में शामिल सभी योद्धाओं को भारतीय जनता सदैव याद रखेगी। उनके बलिदान को सलाम करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को एक होकर भारत की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने का आह्वान किया। सुम्नाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन की यह 75वीं वर्षगांठ ना केवल इतिहास का पुनरावलोकन है, बल्कि आने वाले समय के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

