संकट मोचन संगीत समारोह की 103 वीं वर्षगांठ पर वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और समावेशी भावना फिर से जीवंत हो गई है। यह आयोजन जो हनुमान जी के प्राचीन मंदिर में आयोजित होता है, सभी धर्मों के कलाकारों को एक मंच पर लाता है, जहां भक्ति और विभिन्न संगीत परंपराएं पूरी तरह से मिलती हैं।
वाराणसी, जो धर्म और संगीत का प्रमुख केंद्र माना जाता है, इस समारोह के माध्यम से यह संदेश देता है कि धार्मिक भेदभाव के बावजूद कला और श्रद्धा की साझेदारी समाज को एक नया रूप दे सकती है। संकट मोचन मंदिर का माहौल इस दौरान भक्तिमय संगीत से गूंज उठता है, जहां कलाकार अपनी आस्था और संगीत से लोगों के दिलों को छू लेते हैं।
यह समारोह कई दशकों से लगातार आयोजित हो रहा है और हर साल हजारों संगीत प्रेमी इसमें सम्मिलित होते हैं। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत, भजन, कीर्तन और लोक संगीत के विविध रूप प्रस्तुत किए जाते हैं, जो दर्शाते हैं कि संगीत का दर्शन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता की अनुभूति कराता है।
इस साल भी समारोह की शुरुआत में हनुमान चालीसा के गायन से हुई जिसने सभी उपस्थितजनों के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। इसके बाद विभिन्न धर्मों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से एकता और सौहार्द्र का संदेश दिया। यह न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि वाराणसी के लोगों की सहिष्णुता और समावेशी सोच का जीवंत प्रमाण भी है।
संकट मोचन संगीत समारोह का उद्देश्य केवल संगीत का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। यहां के कलाकार और दर्शक दोनों ही इस बात के गवाह हैं कि कैसे संगीत की ताकत सभी भिन्नताओं को पिघला कर एक समृद्ध और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करती है।
वाराणसी के स्थानीय अधिकारियों और मंदिर प्रबंधकों ने भी इस समारोह की महत्ता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि संकट मोचन संगीत समारोह केवल एक संगीत मंडली नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षक भी है, जो प्रत्येक वर्ष नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है।
इस प्रकार, 103 वर्षों से वार्षिक रूप से आयोजित होने वाला संकट मोचन संगीत समारोह न केवल भक्ति और संगीत का संगम है, बल्कि वह सभी धर्मों और समुदायों के बीच प्रेम और विश्वास का एक अद्भुत उदाहरण पेश करता है। वाराणसी की यह विरासत आने वाले वर्षों में भी ऐसी ही सद्भावना और समर्पण के साथ जारी रहनी चाहिए।

