नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले ने पूरे देश में सुर्खियां बटोर ली हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की गई कार्रवाई ने इस घटना के कई राज खोल दिए हैं। मनीषा मंधारे, जो पुणे की बॉटनी प्रोफेसर हैं, को उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। मंगलवार को उन्हें दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया जहां उन्हें 14 दिन की CBI हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
CBI के अनुसार, मनीषा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने विषय विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त किया था। इसी नियुक्ति के कारण उन्हें नीट परीक्षा के बॉटनी और जूलॉजी विषय के प्रश्नपत्रों तक पहुंच मिली। यह स्थिति परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा की कमी को उजागर करती है। जांच में पाया गया कि मनीषा और एक अन्य आरोपी, पी.वी. कुलकर्णी, ने छात्रों को विशेष क्लासों में संभावित प्रश्न और उनके उत्तर जानकर परीक्षा में इसका दुरुपयोग किया।
पेपर लीक का जाल और डिजिटल माध्यम
CBI का दावा है कि Pune, Nashik, Gurgaon और Jaipur तक फैले इस घोटाले में डिजिटल माध्यम जैसे व्हाट्सऐप और टेलीग्राम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। पेपर लीक की जानकारी पहले कुछ कोचिंग सेंटरों तक पहुंची और फिर यह जानकारी इंटरनेट के जरिये और अधिक लोगों तक फैली। एजेंसी ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच अभी जारी है।
एनटीए अधिकारियों की संभावित भूमिका
जांच में यह भी पता चला कि केवल एनटीए के कुछ वरिष्ठ अधिकारी ही अंतिम प्रश्नपत्र की पूरी जानकारी रखते हैं। ऐसे में CBI को शक है कि परीक्षा प्रक्रिया के वीआईपी कर्मचारियों ने पेपर लीक में अनियमितता की हो सकती है। इसका संकेत इस बात से भी मिलता है कि मनीषा और कुलकर्णी जैसे शिक्षकों के पास इतनी गुप्त जानकारी कैसे पहुंची।
परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा के प्रति गंभीर सवाल
CBI अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली परीक्षाओं की सुरक्षा प्रणाली जटिल और कड़ी होती है। विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों में से मिलने-जुलने प्रश्न अंतिम पेपर का हिस्सा बनते हैं। लेकिन जांच के दौरान यह सूचना मिली कि आरोपियों के पास पूरी प्रश्नावली की जानकारी थी, जिससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
आर्थिक लेनदेन और रिश्वत के संकेत
आरंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर लीक के बदले पैसे की मांग की गई थी। CBI के अनुसार, यह रैकेट संगठित रूप से काम कर रहा था जिसमें बिचौलियों के साथ-साथ कुछ छात्रों की संलिप्तता भी हो सकती है। एजेंसी इस मामले की तह तक जाने को प्रतिबद्ध है।
मनीषा की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप
जांच में यह बात सामने आई कि मनीषा ने कोचिंग के दौरान न केवल अपने विशेषज्ञ विषय बॉटनी के संभावित प्रश्न साझा किए बल्कि जूलॉजी के भी प्रश्न छात्रों को बताए। इससे माना जा रहा है कि यह एक संगठित साजिश थी, न कि किसी एक व्यक्ति की गलती।
पेपर लीक की नई तारीख और आगे की प्रक्रिया
शिक्षा मंत्रालय की शिकायत के बाद CBI ने 12 मई 2026 को इस मामले में केस दर्ज किया था। इस जांच के चलते नीट परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। नई परीक्षा 21 जून 2026 को होगी, ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली में निहित कमजोरियों को उजागर किया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जांच एजेंसी पूरी पारदर्शिता से मामले की तह तक जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। छात्रों, अभिभावकों और शैक्षिक जगत के लिए यह राहत की बात होगी।

