सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से राज्यों की पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों के लिए फंड की याचिकाओं पर विचार करने को कहा

Rashtrabaan

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने संज्ञान में लेकर पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के काम न करने की स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को राज्यों की फंड की याचिकाओं पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया है। इस कदम के पीछे मुख्य कारण पिछले कुछ महीनों में अचानक बढ़े हुए हिरासत में मौत के मामलों का संबंध पुलिस थानों में सीसीटीवी मॉनिटरिंग की कमी से जोड़ना है।

    सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों का खराब या निष्क्रिय होना अपराध और स्वतंत्र जांच दोनों को प्रभावित करता है। जेल और पुलिस हिरासत के दौरान उत्पीड़न या अन्यायपूर्ण व्यवहार की घटनाओं को रोकने और उचित साक्ष्य एकत्रित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे अहम भूमिका निभाते हैं। इस कारण से, न्यायालय ने केंद्र से राज्यों द्वारा की गई आर्थिक सहायता की मांगों पर त्वरित ध्यान देने का आग्रह किया है ताकि आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध करवा कर सीसीटीवी प्रणाली की कारगर स्थापना हो सके।

    केंद्र और राज्य सरकारों के बीच यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है जहाँ कई राज्यों ने अपनी आर्थिक सीमाओं का हवाला देते हुए फंड की कमी जताई है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों का संरक्षण सर्वोपरि है और इस मामले में फंड की कमी बहाने नहीं बन सकती।

    विधायिका और कार्यपालिका संस्थानों को सूचित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल निगरानी को सशक्त बनाकर पुलिस थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु हरसंभव कदम उठाने को कहा है। न्यायालय ने यह भी सुझाव दिया है कि तकनीकी अपग्रेडेशन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस थानों में गुणवत्ता युक्त सीसीटीवी कैमरों का होना न केवल हिरासत में रह रहे व्यक्तियों के सुरक्षा अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि जनता का पुलिस विभाग पर विश्वास भी बढ़ाता है। इसके अलावा, कैमरों द्वारा रिकॉर्ड की गयी फुटेज पुलिसकर्मियों के पक्ष में भी प्रमाण स्वरूप काम कर सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि न्यायपालिका ने इस संवेदनशील मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और उचित कार्रवाई के माध्यम से हिरासत में मौतों की घटनाओं को रोकना प्राथमिकता दी है। इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा त्वरित और प्रभावी कदम उठाना आवश्यक माना जा रहा है।

    अंततः, देश में कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तकनीकी संवेदीकरण को बढ़ावा देना अनिवार्य है और सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश उससे जुड़ी जिम्मेदारी को दर्शाता है। उम्मीद की जा रही है कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर इस पर तेजी से कार्य करेंगे ताकि निजता, सुरक्षा और न्याय की गारंटी दी जा सके।

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