असम से पहली बार कानूनी रूप से अगर्वुड चिप्स का निर्यात पश्चिम एशिया के देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को किया गया है। यह निर्यात न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे लगभग ₹50,000 करोड़ के औद्योगिक संभावनाएं खुलेंगी।
अगर्वुड, जिसे हिंदी में ‘अगर्वाट’ भी कहा जाता है, एक बहुमूल्य लकड़ी है जिसका उपयोग खुशबूदार तेल बनाने में किया जाता है। दुनिया भर में इसका मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है, खासकर परफ्यूम, दवाओं और धार्मिक अनुष्ठानों में। असम के जंगलों में पाए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले अगर्वुड की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ रही है।
इस निर्यात के माध्यम से असम ने अपनी वन संपदा को सम्मानित करते हुए, उसकी कानूनी और नियंत्रित कटाई का मार्ग प्रशस्त किया है। इस तरह के निर्यात से स्थानीय किसानों और संग्रहकर्ताओं को आर्थिक लाभ मिलेगा और अवैध कटाई रोकने में भी सहायता मिलेगी। राज्य सरकार ने भी अगर्वुड उत्पादन में सुधार के लिए कई योजनाएं लागू की हैं ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके और गुणवत्ता को सर्वोच्च स्तर पर रखा जा सके।
पश्चिम एशियाई देशों में अगर्वुड के निर्यात से संबंधित यह पहला करेंट है, जिसने व्यापार के नए द्वार खोल दिए हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, जो परफ्यूम और इत्र उद्योगों के प्रमुख केंद्र हैं, असम के इस उत्पाद के लिए अत्यंत उत्सुक हैं। वहीं, इस निर्यात से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जो स्थानीय आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इसी प्रकार निर्यात सकारात्मक रूप से बढ़ता रहा, तो यह उद्योग भविष्य में ₹50,000 करोड़ के आर्थिक मूल्य तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा ताकि असम की प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे।
इस उपलब्धि से यह संदेश भी जाता है कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग दक्षता और सततता के साथ किया जा सकता है। अगर्वुड निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़कर असम न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि यह पूरे देश के वन उत्पादों के निर्यात को एक नई पहचान देगा।

