भारत और अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक के समापन पर जारी एक घोषणा में दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व में एक “न्यायसंगत, व्यापक और स्थायी शांति” प्राप्त करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। यह शांति अंतरराष्ट्रीय कानून, संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप होनी चाहिए।
इस बैठक में दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय संघर्षों को हल करने और स्थिरता स्थापित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना भारत और अरब देशों की एक साझा प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने आतंकवाद, हिंसा और चरमपंथ के खतरे से निजात पाने के लिए भी संयुक्त कार्रवाई की महत्ता पर सहमति जताई।
भारत ने हमेशा से यह रेखांकित किया है कि क्षेत्र में सभी पक्षों के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए समस्या का शांतिपूर्ण समाधान ही स्थायी शांति का मार्ग है। इस संदर्भ में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार किसी भी विवाद का निपटारा करने का पक्ष रखा है।
अरब देशों ने भी इस बैठक में भारत के मध्य पूर्व क्षेत्र में संतुलित और निष्पक्ष भूमिका को सराहा है। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर चर्चा की।
हालांकि, BRICS सम्मेलन में पश्चिम एशिया को लेकर पूर्ण सहमति नहीं बन पाने की जानकारी भी सामने आई है। विभिन्न मतभेदों के कारण इस मुद्दे पर एक स्पष्ट स्थिर रुख नहीं बन पाया है, लेकिन भारत ने फिलिस्तीन के प्रति अपनी स्थिति जस की तस बरकरार रखी है।
समाप्त करते हुए, दोनों पक्षों ने शांति प्रक्रिया को गति देने और सभी हितधारकों के बीच संवाद कायम करने के महत्त्व पर जोर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बैठकों को क्षेत्रीय शांति के प्रति भारतीय प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतिबिंब बताया है। इस प्रगति में निरंतर प्रयासों को जारी रखने का संकल्प सभी ने व्यक्त किया है।

