रायपुर। कांकेर जिले के छोटेबेठिया पुलिस थाना क्षेत्र में हुई दर्दनाक घटना में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के चार जवान शहीद हो गए। इनमें से कांस्टेबल परमानंद कोर्राम मुंबई के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, इनके तीन साथी पहले ही इस विस्फोट में शहीद हो चुके थे।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब डीआरजी की एक विशेष टीम संदिग्ध बारूदी सुरंगों की तलाश और निष्क्रियकरण के मिशन पर थी। टीम कांकेर-नारायणपुर की सीमा क्षेत्र में गुमनाम खतरों का सामना करते हुए इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही थी। अचानक जमीन के नीचे दबे एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (आईईडी) के विस्फोट ने चारों जवानों को घायल कर दिया।
घटना इतनी तेज थी कि आसपास का इलाका भी हिल उठा। घायल जवानों को तुरंत निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति गंभीर थी। देर रात कांस्टेबल परमानंद ने अस्पताल में अंतिम सांस ली। अन्य तीन शहीदों की पहचान डीआरजी प्रभारी सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा और संजय गढ़पाले के रूप में हुई है।
शहीदों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता की सुरक्षा के लिए बहादुरी से कार्य किया। उनकी शहादत बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने के दौरान मिली, जो क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक कार्य था।
इस दुखद घटना से कांकेर जिले का पूरा समुदाय गहरे सदमे में है। कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले के परिवार में आगामी वर्ष की शादी की खुशी थी, जो अब शोक में बदल गई है। पूरे इलाके में शहीद जवानों को अंतिम विदाई दी गई, जहां उनकी बहादुरी और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि मिली।
स्थानीय प्रशासन ने शहीदों के परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है, जबकि सुरक्षा बलों ने इस घटना के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी है ताकि क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को रोकने के लिए तत्परता बढ़ाई जा सके।
यह घटना न केवल सामरिक स्तर पर घाटा है, बल्कि मानवीय रूप से भी छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। शहीद जवानों ने अपने परिवार व प्रदेश के लिए जो त्याग और बलिदान दिया, उससे उनका नाम सदैव सम्मानित रहेगा।

