न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहे हार्वी वेन्स्टीन के तीसरे दुष्कर्म मुकदमे का फैसला टेकनिकली मिस्ट्रायल घोषित कर दिया गया है। इस मामले में मैनहट्टन जिला अभियोजक कार्यालय ने आरोप लगाया था कि वेन्स्टीन ने 2013 में मैनहट्टन के एक होटल के कमरे में एक अभिनेत्री के साथ बलात्कार किया था, जबकि वह लगातार मना कर रही थी और ‘‘नहीं’’ कह रही थी।
यह मुकदमा लंबे समय से मीडिया और जनता का ध्यान आकर्षित करता आ रहा है क्योंकि यह हॉलीवुड के एक प्रभावशाली फिल्म निर्माता के खिलाफ घोर गंभीर आरोप है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि वेन्स्टीन ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती की और इस अपराध को अंजाम दिया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने आरोपों को विवादित बताया और कहा कि यह सहमति से संपन्न संबंध था।
इस प्रकार के मामलों में अक्सर साक्ष्यों और गवाही की भूमिका निर्णायक होती है। इस मामले में, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रकरण में जजों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इसलिए अंतिम फैसला नहीं सुनाया जा सका और मामला टाल दिया गया। यह मिस्ट्रायल, यानी निर्णय की कमी, न्यायिक प्रक्रिया में कभी-कभी देखी जाने वाली स्थिति है, जब सहभागी पक्षों की तर्क-वितर्क में पूर्ण सहमति नहीं होती।
हार्वी वेन्स्टीन के खिलाफ कुल मिलाकर कई मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से कुछ में वह दोषी भी ठहराए जा चुके हैं। उनका यह नवीनतम मुकदमा भी इस बारीक और संवेदनशील विषय पर कानूनी लड़ाई की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है।
पीड़िता ने अदालत में बताया कि कैसे उन्होंने विरोध किया, ‘‘मैंने बार-बार कहा कि नहीं, लेकिन वेन्स्टीन ने मेरी इच्छा का सम्मान नहीं किया।’’ ऐसे गवाह और उनके बयान केस के निर्णायक पहलू होते हैं। यह प्रकरण महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सतर्कता की जरूरत पर भी प्रकाश डालता है, विशेषकर उन मामलों में जहां समाज में प्रभावशाली लोग आरोपी हों।
न्याय व्यवस्था ने आयोग्य और संवेदनशील मामलों में सच की खोज करना प्राथमिकता बनाई है। वेन्स्टीन के खिलाफ मुकदमों का व्यापक प्रभाव हॉलीवुड में उत्पन्न

