पंचम निशाद के शशि व्यास द्वारा 20 वर्ष पूर्व शुरू किया गया यह महोत्सव शास्त्रीय संगीत की परंपरा को जीवित रखते हुए, युवा प्रतिभाओं के लिए उत्कृष्ट मंच प्रदान करता आ रहा है। इस महोत्सव ने न केवल कलाकारों को सम्मानित किया है बल्कि नई पीढ़ी के संगीतकारों को अपनी प्रतिभा को उभारने और प्रस्तुत करने का मौका भी दिया है।
शशि व्यास का मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को निरंतरता और प्रगति दोनों की आवश्यकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने इस महोत्सव की शुरुआत की, जो कि आज पूरे देश में शास्त्रीय संगीत की सबसे बड़ी प्रस्तुतियों में से एक माना जाता है। महोत्सव हर साल संगीत के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत करता है, जिसमें युवा कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती है।
महोत्सव के माध्यम से अब तक कई प्रतिभाशाली कलाकार उभरे हैं, जिन्होंने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आयोजकों का प्रयास रहता है कि प्रतिभान्वित कलाकारों को उचित मंच मिले और वे दुनिया के समक्ष अपनी कला प्रस्तुत कर सकें। यह महोत्सव श्रोताओं के लिए भी योगदाय रहा है, क्योंकि यहाँ वे शास्त्रीय संगीत की नवीनतम धड़कनों और विविधताओं का अनुभव कर सकें।
संगीतज्ञ, शिक्षाविद और शास्त्रीय संगीत प्रेमी इस महोत्सव को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन के रूप में देखते हैं। यह युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत भी है। 20 साल के इस सफर ने यह साबित किया है कि सही दिशा और अवसर मिलें तो कला अपनी छाप छोड़ती है। शशि व्यास और पंचम निशाद की यह पहल भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और संवर्धन में मील का पत्थर साबित हुई है।
महोत्सव का अगला संस्करण और भी व्यापक दृष्टिकोण और अधिक प्रतिभाओं को समर्पित होगा ताकि भारतीय शास्त्रीय संगीत का भविष्य उज्जवल बना रहे। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कलाकारों का पोषण और उनका मंचन समाज और संस्कृति के विकास के लिए आवश्यक है। इसी भावना के साथ महोत्सव आगे भी अपनी यात्रा जारी रखेगा।

