लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मुख्यालय के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगाया गया है, जिसमें भाजपा सरकार पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) समाज के आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पोस्टर में सूचित किया गया है कि प्रदेश में चल रही विभिन्न सरकारी भर्तियों में ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों के साथ धोखा किया जा रहा है तथा आरक्षण के संवैधानिक नियमों का ठीक प्रकार पालन नहीं हो रहा है।
समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान ने इस पोस्टर को जारी करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पीडीए समाज के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का हक छीना जा रहा है और कई भर्तियों में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग को नियमानुसार आरक्षण नहीं दिया जा रहा है।
पोस्टर में कई ठोस उदाहरण दिए गए हैं जिनमें सबसे प्रमुख मामला 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले का है, जिसमें ओबीसी और एससी के आरक्षण की लूट करने का आरोप भाजपा सरकार पर लगाया गया है। बताया गया कि ओबीसी समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए था, लेकिन केवल 3.8 प्रतिशत ही प्रदान किया गया।
इसी प्रकार यूपीएसएससी प्राविधिक सहायक (विज्ञान एवं कृषि) भर्ती में कुल 3448 पदों पर एससी समुदाय को 21 प्रतिशत के हिसाब से 723 पद मिलने चाहिए थे, पर केवल 509 पद (14 प्रतिशत) ही दिए गए। वहीं ओबीसी को मिलने चाहिए थे 930 पद, लेकिन केवल 629 पद आवंटित किए गए। ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में 1468 पदों पर ओबीसी को 27 प्रतिशत के अनुसार 396 पद मिलने चाहिए थे। लेकिन इन्हें केवल 139 पद ही मिले।
इसके अलावा बांदा कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर भर्ती में मुख्यमंत्री की स्वजातीय उम्मीदवारों का चयन 80 प्रतिशत तक बताया गया है, जो एक गंभीर आरोप है। पोस्टर में यूपीपीएससी पर भी ओबीसी, एससी/एसटी की ओवरलैपिंग खत्म करने, लेटरल एंट्री भर्ती, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, खंड शिक्षा अधिकारी परीक्षा 2019, विश्वविद्यालयों में एनएफएस आरक्षण और विश्वविद्यालयों के वीसी पदों पर 90 प्रतिशत गैर-पीडीए नियुक्तियों जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।
मनोज पासवान ने युवाओं से अपील की है कि वे इन भर्ती घोटालों के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने हक के लिए संघर्ष करें ताकि आरक्षण के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई पीडीए समाज के सशक्तिकरण की है, जिसके बिना समानता और न्याय संभव नहीं।

