नक्षत्र कलेक्शन में बिना बिल का कारोबार, ग्राहकों से बदसलूकी और धमकी का आरोप

Rashtrabaan
नक्षत्र कलेक्शन बना ग्राहकों से लूट का अड्डा।

सिवनी, राष्ट्रबाण। शहर में कपड़ा कारोबारियों द्वारा ग्राहकों को बिना बिल के कपड़े बेचने और टैक्स चोरी करने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। स्थिति यह है कि कई दुकानदार ग्राहकों को कच्चा बिल पकड़ा देते हैं या फिर बिना बिल ही बिक्री कर देते हैं। ऐसे में न केवल शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि ग्राहकों को भी धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ रहा है। ताजा मामला सिवनी शहर के मठ मंदिर रोड स्थित नक्षत्र कलेक्शन नामक प्रतिष्ठान का सामने आया है, जहां कपड़े की वापसी को लेकर ग्राहक और दुकानदार के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि संचालक ने ग्राहकों से बदसलूकी करते हुए धमकी तक दे डाली।

ग्राहक को धमकाया, कहा- यह हमारी दुकान की साड़ी नहीं

मामले की जानकारी के अनुसार, एक महिला ग्राहक ने कुछ दिन पहले नक्षत्र कलेक्शन से एक साड़ी खरीदी थी। साड़ी में समस्या आने पर महिला ने दो दिन के भीतर ही दुकान पर जाकर साड़ी लौटाने की कोशिश की। ग्राहक का कहना है कि उन्होंने साड़ी बिल्कुल नहीं पहनी थी और सामान्य स्थिति में अधिकांश दुकानें सात दिन की वापसी अवधि देती हैं। लेकिन जब ग्राहक ने साड़ी वापसी की मांग रखी तो दुकान संचालक ने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह साड़ी उनकी दुकान की नहीं है और वह इसे किसी भी हालत में वापस नहीं लेंगे।

ग्राहक ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने दुकान से किए गए ऑनलाइन पेमेंट का सबूत दिखाया, तब भी संचालक ने टालमटोल किया और धमकाते हुए कहा कि “हम इसे नहीं मानते, यह साड़ी हमारी दुकान की नहीं है।” इतना ही नहीं, ग्राहक का कहना है कि पूरे लेन-देन में उन्हें कोई पक्का बिल भी नहीं दिया गया। इस कारण वे अपने उपभोक्ता अधिकारों का उपयोग भी नहीं कर पा रही हैं।

कच्चे बिल से जीएसटी चोरी

जानकारों का कहना है कि कपड़ा बाजार में इस तरह की गड़बड़ियां आम हो चुकी हैं। कई व्यापारी ग्राहकों को केवल कच्चा बिल थमा देते हैं, जिससे न तो ग्राहक के पास खरीदारी का पक्का प्रमाण रहता है और न ही शासन-प्रशासन को सही आंकड़ा मिलता है। कुछ दुकानदार तो खुलेआम बिना किसी बिल के ही कपड़े बेच देते हैं। कपड़ा कारोबार में रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन होता है। लेकिन जब इस पर जीएसटी का हिसाब किताब नहीं दिखाया जाता तो सीधे-सीधे कर चोरी का मामला बनता है। इस तरह व्यापारी मोटा मुनाफा तो कमा लेते हैं, लेकिन सरकार को मिलने वाला टैक्स बीच में ही दबा लिया जाता है।

ग्राहक अधिकारों का हनन

इस घटना से यह भी साफ होता है कि बिना पक्का बिल दिए जाने पर ग्राहक के अधिकार पूरी तरह से दब जाते हैं। बिल ही वह दस्तावेज है जिसके आधार पर ग्राहक न केवल वस्तु की वापसी या अदला-बदली कर सकते हैं बल्कि यदि कोई विवाद होता है तो उपभोक्ता फोरम में भी अपनी बात साबित कर सकते हैं। लेकिन जब बिल ही नहीं दिया जाता, तब ग्राहक मजबूर हो जाता है। नक्षत्र कलेक्शन के इस मामले में भी यही स्थिति सामने आई है। ग्राहक ने साफ कहा कि उन्होंने दुकान में ऑनलाइन भुगतान किया था, जो साफ तौर पर यह प्रमाणित करता है कि साड़ी उसी दुकान से खरीदी गई थी। बावजूद इसके, संचालक ने साड़ी लौटाने से इनकार किया और ग्राहकों से बदसलूकी की।

कपड़ा व्यापार पर लगाम जरूरी

सूत्र बताते हैं कि जिले में ऐसे कई कपड़ा प्रतिष्ठान हैं जो इसी तरह का खेल खेल रहे हैं। ग्राहकों को कच्चा बिल देकर या बिना बिल बिक्री करके ये व्यापारी न केवल ग्राहकों के साथ अन्याय कर रहे हैं बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व का भी गबन कर रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कपड़ा कारोबार में पारदर्शिता लाई जाए और हर ग्राहक को जीएसटी सहित पक्का बिल दिया जाए तो न केवल ग्राहकों के अधिकार सुरक्षित होंगे बल्कि शासन को भी करोड़ों का राजस्व मिलेगा।

Read Also : BJP कार्यकर्ताओं के हंगामे पर राहुल गांधी का तंज, कहा – ‘मारो, तोड़ो… हम डरने वाले नहीं

error: Content is protected !!