जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार द्वारा पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव समय पर न कराए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावों के लिए सरकार को पर्याप्त समय दिया गया था, फिर भी चुनाव बार-बार टाल दिए जा रहे हैं, जो न्यायिक और संवैधानिक नियमों के विपरीत है।
यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ के सामने आया। सुनवाई के बाद दोनों न्यायाधीशों ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
राज्य सरकार के पक्ष में महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में होने वाली देरी का प्रमुख कारण वार्ड परिसीमन से जुड़े हाईकोर्ट के आदेश हैं, जिनके कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है। साथ ही, ओबीसी आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट आयोग अब तक प्रस्तुत नहीं कर पाया है, जिससे चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया।
हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाए कि पंचायत चुनाव भी निर्धारित समय में क्यों आयोजित नहीं किए जा सके। अदालत ने कहा कि पहले के निर्देश मुख्यतः स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित थे, किंतु पंचायत चुनावों में हुई देरी पर भी स्पष्टीकरण जरूरी है।
पीठ ने ओबीसी आयोग की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी न मिलने पर भी असंतोष जताया और कहा कि सही एवं समय पर जानकारी मिलने से मामले का समाधान सहज होता।
सरकार ने चुनाव टालने के लिए मौसम को भी कारण बताया। महाधिवक्ता ने कहा कि जून माह में राजस्थान में अत्यधिक गर्मी रहती है और जुलाई में मानसून शुरू हो जाता है, जिसके कारण चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होता है।
इस दलील को कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि राजस्थान के नागरिक इन मौसमों के प्रति अभ्यस्त हैं और यह चुनाव करवाने में कोई बड़ी बाधा नहीं हो सकती।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सरकार पर जानबूझकर चुनाव टालने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे राज्य में संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया है। पंचायत एवं स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह वर्तमान में अधिकारी प्रशासन चला रहे हैं, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है।
अधिवक्ता पुनीत सिंहवी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की मंशा चुनाव कराने की नहीं लगती। वहीं अधिवक्ता प्रेमचंद देवड़ा ने कहा कि हजारों पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव लगभग डेढ़ साल से स्थगित हैं, जिससे ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों का अभाव है।
उल्लेखनीय है कि 14 नवंबर 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट ने 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक आयोजित किए जाएं। साथ ही परिसीमन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने का भी आदेश दिया गया था।
यह मामला राज्य में चुनावी व्यवस्था और लोकतंत्र के अच्छे संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और आगामी फैसले पर सभी की नज़रें लगी हुई हैं।

