गोरखपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को उनके मानदेय में वृद्धि को सरकार की संवेदनशीलता का परिचायक बताते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने जोर दिया कि संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है, न कि टकराव की राजनीति से।
सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने वर्षों से लंबित शिक्षामित्रों की मांगों को संवेदनशीलता से देखा और उन्हें पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि विवाद और टकराव से न केवल शिक्षामित्रों को, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान होता है। इसलिए संवाद एवं सहयोग के माध्यम से ही आगे बढ़ना उचित होगा।
उन्होंने बताया कि पूर्व की सरकारों द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने का प्रयास किया गया था, जो कानूनन गलत था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्रों की सेवाओं पर संकट मंडरा रहा था। इसके परिणामस्वरूप डेढ़ लाख से अधिक परिवारों के रोज़गार को खतरा था, जिसे उनकी सरकार ने समय रहते समझा और स्थिति संभाली।
सीएम योगी ने कहा कि 2017 में शिक्षामित्रों को हटाने की बजाय उनकी सेवाओं को बनाए रखते हुए मानदेय ₹3,500 से बढ़ाकर ₹10,000 किया गया। सरकार मानदेय बढ़ाने के लिए हमेशा तत्पर है, लेकिन कुछ लोग शिक्षामित्रों के बीच भ्रम तथा शोषण की स्थिति उत्पन्न करते हैं, जिससे बाधा आती है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को यह भी समझाया कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि समाज के निर्माणकर्ता भी होते हैं। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच समाज के लिए हानिकारक है, जबकि सकारात्मक सोच से मजबूत और बेहतर पीढ़ी का निर्माण संभव है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक भी बच्चा स्कूल छोड़ना राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा संकट है।
सरकार की पहल के तहत बालिकाओं की शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिशा में स्कूलों में पेयजल, शौचालय और सुरक्षा के उपाय प्राथमिकता से पूरे किए गए हैं। 1.60 करोड़ से अधिक बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर जैसी आवश्यक सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो 2017 से पहले असंभव था।
सीएम योगी ने शिक्षामित्रों को ट्रेड यूनियन की प्रवृत्ति से दूर रहने का सुझाव दिया क्योंकि इससे समाज को नुकसान होता है। उनका मानना है कि “पहले देश, फिर हम” की भावना से ही समाज और राष्ट्र सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने ‘स्कूल चलो अभियान’ का उल्लेख करते हुए बताया कि पहले चरण में 20 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन हुआ है, जिसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। उन्होंने आगामी चरणों में इस संख्या को और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंत में मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2017 से पहले शहर की छवि खराब थी, लेकिन अब सुरक्षा, निवेश और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। गीडा क्षेत्र में स्थापित उद्योगों में 50,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है, जो क्षेत्र की समृद्धि का परिचायक है।

