लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की सरकार ने पिछले 9 वर्षों में रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। इस अवधि में उत्तर प्रदेश ने न केवल देश में सबसे अधिक सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियां प्रदान कर एक मजबूत आर्थिक आधार बनाया है, बल्कि युवाओं एवं महिलाओं को स्वावलंबन और स्वरोजगार के रास्ते भी उपलब्ध कराए हैं।
सरकार ने प्रदेश की आर्थिक वृद्धि को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के रूप में स्थापित किया है, जिसके तहत रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई। बीते 9 वर्षों में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों के अलावा निजी क्षेत्र में भी युवाओं के लिए व्यापक अवसर प्रदान किए गए हैं। खासतौर पर यूपी पुलिस में 2.19 लाख से अधिक भर्ती और शिक्षा विभाग में 1.65 लाख से अधिक नियुक्तियां इस दिशा के उल्लेखनीय उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न भर्ती बोर्डों और सेवा आयोगों द्वारा हजारों भर्तियां पारदर्शिता के साथ पूरी की गई हैं।
एमएसएमई सेक्टर की विकास दर भी प्रदेश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने में अहम रही है। पहले जहां प्रदेश में 2017 तक लगभग 14 हजार कारखाने पंजीकृत थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 31 हजार से ऊपर पहुंच चुकी है। इस क्षेत्र से 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग के विस्तार से लाखों रोजगार सृजित हुए हैं।
सरकार ने युवाओं और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के लिए अनेक योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के तहत अधिकतर लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिससे स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान ने भी 1.47 लाख युवाओं को सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने में मदद दी है, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।
खेलों के क्षेत्र में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सरकारी विभागों में नौकरी देकर प्रोत्साहित किया गया है। इस योजना के तहत अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को सेवायोजन मिला है। वहीं, बीसी सखी योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का भी सशक्तिकरण किया गया है, जिनके बैंकिंग लेन-देन और आय में काफी वृद्धि हुई है। ड्रोन तकनीक प्रशिक्षण जैसे पहल से महिलाओं को खेती में आधुनिकता अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है।
संवर्धन गतिविधियों के जरिए 64.34 लाख महिला किसान परिवारों को कृषि से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया गया है। स्वयं सहायता समूहों की मदद से 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में आ गई हैं और एक करोड़ से अधिक महिलाएं रोजगार हेतु जुड़ी हैं।
इन उपलब्धियों के आधार पर कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश ने रोजगार, निवेश, उद्यमिता तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। प्रदेश के युवाओं का स्वरूप अब बदल चुका है, वे दूसरे राज्यों के बजाय अपने प्रदेश में बेहतर अवसरों की खोज कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं ने उनमें आत्मविश्वास भरकर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज देश में रोजगार और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण बन कर उभरा है।

