लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में व्यापक लापरवाही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कदम उठाने की पहल की गई है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश भर के चिकित्साधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने का संदेश साफ हो गया है।
ब्रजेश पाठक ने कहा है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ और सरकारी सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के तहत, पांच चिकित्साधिकारियों को ड्यूटी से अनुपस्थित रहने, प्रशासनिक दोष और मरीजों के इलाज में कोताही के आरोप में तत्काल बर्खास्त कर दिया गया। इनमें गोरखपुर की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर के डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के सीएचसी जगदीशपुर के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया के सीएचसी दिबियापुर की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच के अनुसार, ये चिकित्साधिकारी लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहे तथा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं कर पाए। इस कार्रवाई का प्रभाव सबसे अधिक अंबेडकरनगर में महसूस किया गया, जहां मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी अस्पतालों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण में अनियमितता के साथ ही पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे। तीन सदस्यीय एडीएम जांच समिति ने इनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई का प्रस्ताव दिया।
हरदोई के संडीला में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर भी लापरवाही का आरोप लगा है, जहां अवैध निजी अस्पतालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय जांच जारी है और उच्च अधिकारियों ने सीएमओ से जवाब तलब किया है कि वरिष्ठ डॉक्टरों के बावजूद क्यों कनिष्ठ चिकित्साधिकारी को वरिष्ठ पद का दायित्व सौंपा गया।
इसी प्रकार प्रयागराज के मेजा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर को प्रशासनिक लापरवाही और अधीनस्थों पर नियंत्रण न रखने के कारण स्थानांतरण आदेशित किए गए हैं। वहीं, सुल्तानपुर के लंभुआ सीएचसी में महिला मरीजों के इलाज में कोताही बरतने पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह, चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मराज एवं फार्मासिस्ट अवधनारायण के खिलाफ कार्रवाई निर्देशित की गई है।
मथुरा जिला चिकित्सालय में भी मेडिकल परीक्षण में अनियमितता के आरोपों के तहत इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. देवेंद्र कुमार और सर्जन डॉ. विकास मिश्रा के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की गई है। इसके अलावा बलरामपुर, वाराणसी, बदायूं, खीरी, संभल समेत कई जिलों में तैनात चिकित्साधिकारियों पर कर्तव्य में लापरवाही तथा प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर जांच प्रक्रिया शुरू की गई है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के अस्थिरोग विभाग में सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल के खिलाफ महिला चिकित्साधिकारी और अन्य डॉक्टर्स के साथ अभद्रता के आरोप भी लगे हैं, जिन पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी प्रकार, बहराइच की डॉ. प्रतिभा यादव और मथुरा के डॉ. राकेश सिंह को परिनिंदा दंड दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्टेट हेल्थ एजेंसी की कैशलेस चिकित्सा योजना में तैनात डॉ. आदित्य पांडेय की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मुख्य तैनाती स्थल रायबरेली वापस भेजने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही, कई चिकित्साधिकारियों की वेतनवृद्धि भी रोक दी गई है। हमीरपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि पर प्रसूताओं से वसूली एवं अभद्रता के आरोप में तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई हैं। इसी प्रकार बलरामपुर के डॉ. संतोष सिंह की चार तथा झांसी की डॉ. निशा बुंदेला की दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई हैं।
झांसी के ट्रॉमा सेंटर में तैनात आर्थो सर्जन डॉ. पवन साहू पर निजी प्रैक्टिस के आरोप भी पुष्ट हुए हैं, जिसके कारण उनकी दो वेतनवृद्धियां रोकी गईं और परिनिंदा दंड की सिफारिश की गई है।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। मरीजों के हितों से समझौता करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस अभियान से स्वास्थ्य विभाग में सुधार की नई प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

