जबलपुर। जबलपुर की जिला अदालत ने बरगी हादसे की सुनवाई के दौरान जो टिप्पणियां कीं, वे उन सिस्टम के चेहरों पर तमाचा हैं जो अब तक जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहे थे। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब क्रूज पलट रहा था, तब चालक और उसका स्टाफ पूरी स्थिति से वाकिफ था। उनके पास मौका था कि वे यात्रियों की जान बचाने की कोशिश करते, लेकिन अपनी जान बचाने के लिए मासूमों को मौत के मुंह में धकेल कर भाग जाना किसी जघन्य अपराध से कम नहीं है। अदालत ने इसे समाज के लिए एक “खतरनाक संकेत” बताया है।
बरगी क्रूज हादसा सुरक्षा नियमों पोल खोल दी। जबलपुर कोर्ट के इस ‘सुपर एक्शन’ ने उन परिवारों को न्याय की उम्मीद दी है जिन्होंने अपने अपनों को खोया है। अब देखना यह है कि बरगी पुलिस 48 घंटों के भीतर किन-किन ‘चेहरों’ को बेनकाब करती है।
BNS की धाराओं में फंसेगा ‘गुनाहगार’ अमला
अदालत के आदेश के बाद अब बरगी थाना पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106 (लापरवाही से मृत्यु कारित करना), धारा 110 (आपराधिक मानव वध का प्रयास) सख्त धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाए। अदालत का मानना है कि चालक दल का व्यवहार यह दर्शाता है कि उन्हें यात्रियों की जान की कोई परवाह नहीं थी, जो सीधे तौर पर जानबूझकर किए गए खिलवाड़ की श्रेणी में आता है।
पुलिस को 2 दिन का अल्टीमेटम, रिपोर्ट तलब
अदालत ने बरगी थाना प्रभारी को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि केवल 2 कार्यदिवस के भीतर FIR दर्ज कर जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि इस संवेदनशील मामले में किसी भी प्रकार की देरी या हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब यह जांच सीधे अदालत की निगरानी में होगी, जिससे मामले को दबाने की कोशिशों पर पूरी तरह विराम लग गया है।
इंसानियत और हैवानियत के बीच की लकीर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जहां एक ओर चालक दल की कायरता और हैवानियत पर सवाल उठाए, वहीं उन स्थानीय लोगों और साहसी युवाओं की खुले दिल से सराहना की, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगाई और कई लोगों को बाहर निकाला। कोर्ट ने इसे “मानवता का सच्चा उदाहरण” बताया और कहा कि समाज ऐसे ही नायकों की बदौलत टिका हुआ है।
क्या बड़े अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज?
30 अप्रैल 2026 की उस काली शाम ने 13 घरों के चिराग बुझा दिए। शुरुआती जांच में क्रूज की बेलगाम रफ्तार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई थी। लेकिन अब कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद गाज सिर्फ ड्राइवर या टिकट कलेक्टर जैसे छोटे कर्मचारियों पर नहीं गिरेगी, बल्कि उन रसूखदार बड़े अधिकारियों और ठेकेदार पर भी शिकंजा कसेगा जिन्होंने बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के क्रूज को पानी में उतारने की अनुमति दी थी।

