भोजशाला केस: केशव प्रसाद मौर्य ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया

Rashtrabaan

    लखनऊ। भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने वाले उच्च न्यायालय के निर्णय का उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बहुत लंबे समय से लोग इस मामले को लेकर संघर्ष और आंदोलन कर रहे थे, और अब न्यायालय के इस फैसले से हिंदू समुदाय में उमंग और खुशी की लहर है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि जो लोग मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं, वे इस फैसले से नाराज हैं और प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। उन्होंने उन लोगों को बधाई दी जिन्होंने इस लड़ाई को धैर्य और समर्पण के साथ लड़ा।

    इसी बीच, इंदौर उच्च न्यायालय के वकील विनय जोशी ने बताया कि शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने भोजशाला मामले में हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया है। हालांकि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, और यदि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो उन्हें भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा, जिसके लिए वे तैयार हैं।

    शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे दस्तावेज और प्रमाण मौजूद हैं जो साबित करते हैं कि राजा ने मस्जिद के लिए जमीन दान की थी, इसलिए उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील का पूरा अधिकार है।

    कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने इस फैसले को पूरी तरह एकतरफा बताया और कहा कि वे भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि फैसला विवादित है।

    एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने भी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि फैसला बिना गहन विचार किए और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज करते हुए दिया गया है, जिसे वे पूरी विनम्रता के साथ गलत मानते हैं।

    यह विवाद एक संवेदनशील सामाजिक व धार्मिक मुद्दा है, जिसमें सभी पक्षों ने अपने-अपने दृष्टिकोण खुलकर प्रस्तुत किए हैं। आगे सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है, जो अंतिम फैसला करेगी। फिलहाल ये उच्च न्यायालय का फैसला हिंदू पक्ष के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

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