शिक्षा: जनजातीय सशक्तिकरण की सबसे महत्वपूर्ण चाबी – मोहन भागवत

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    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन बताया। उन्होंने वनवासियों की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित कर्मयोगी एकल शिक्षक मेले में 1,800 से अधिक आदिवासी शिक्षकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने एकल सिंगल-टीचर स्कूल मॉडल की प्रशंसा की और शिक्षकों को सच्चे कर्मयोगी और नि:स्वार्थ कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल साक्षरता नहीं है, बल्कि यह आत्मा का जागरण है। गढ़चिरोली और मेलघाट के सुदूर इलाकों में कार्यरत ये शिक्षक न केवल शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, बल्कि एक सशक्त भारत के निर्माण की नींव भी रख रहे हैं।

    भागवत ने बताया कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य वनवासी समुदायों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाना है साथ ही उनकी अनूठी कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करना है। उन्होंने कहा, “किसी राष्ट्र के उत्थान के लिए उसके सबसे दूरस्थ नागरिकों का सशक्त होना जरूरी है।”

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख ने स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह इस बात का साक्ष्य है कि सामूहिक सामाजिक इच्छाशक्ति शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई को पाट सकती है।

    भागवत ने संस्कार, मूल्यों और संस्कृति के महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि आधुनिक शिक्षा आदिवासी परंपराओं के मूल्य को प्रभावित न करे।

    उन्होंने बताया कि इस विस्तार का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, कौशल विकास, डेयरी प्रशिक्षण जैसे पहलुओं के माध्यम से स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। साथ ही आदिवासी कला, संगीत और वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देना भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    मोहन भागवत ने शहरी जनता से ऐसे जमीनी स्तर के आंदोलनों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा, “वनवासी भाइयों और बहनों की प्रगति के बिना भारत का पुनरुद्धार अधूरा है।”

    इस मौके पर एकल विद्यालय नेटवर्क के विस्तार की भी घोषणा की गई। फिलहाल, यह पहल विदर्भ क्षेत्र में लगभग 1,300 स्कूलों का संचालन कर रही है, जहाँ 30,000 छात्र पढ़ रहे हैं।

    नई योजना के तहत महाराष्ट्र राज्य में 5,000 स्कूलों तक विस्तार, 6,000 शिक्षकों की नियुक्ति और 100,000 से अधिक आदिवासी छात्रों को शिक्षा प्रदान करना लक्ष्य रखा गया है।

    कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके भी शामिल हुए।

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