जरूरी मदद की आवश्यकता: वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले प्रग्गननन्धा की टीम के साथी को वीजा समस्या का सामना

Rashtrabaan

    भारतीय शतरंज प्रतिभा प्रणेशक मुनिरेठिनम की आगामी फीडे वर्ल्ड टीम रैपिड और ब्लिट्ज चैम्पियनशिप में भागीदारी पर वीजा के पेंडिंग होने के कारण अनिश्चितता छाई हुई है। यह टूर्नामेंट हॉंग कॉन्ग में आयोजित किया जाना है, लेकिन वीजा प्रक्रिया में देरी ने उनकी यात्रा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रणेशक, जो प्रग्गननन्धा और वैशाली रमेशनबाबू के नेतृत्व वाली चेसगुरुकुल टीम का हिस्सा हैं, के लिए यह टूर्नामेंट बहुत महत्वपूर्ण है। टीम के कोच आरबी रमेश ने इस मुद्दे को लेकर तत्काल सहायता मांगी है ताकि वीजा प्रक्रिया को तेज किया जा सके और प्रणेशक समय पर टूर्नामेंट में भाग ले सकें।

    कोच आरबी रमेश ने कहा कि प्रणेशक की प्रतिभा और टीम की प्रतिबद्धता को देखते हुए वीजा में देरी उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे समस्या का शीघ्र समाधान करें ताकि भारतीय टीम की तैयारियों पर असर न पड़े।

    चेसगुरुकुल की टीम में प्रग्गननन्धा और वैशाली जैसे नामी खिलाड़ी शामिल हैं जो विश्व स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। ऐसे में टीम के एक सदस्य के भाग लेने में रुकावट आने से पूरा दल प्रभावित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि टूर्नामेंट में भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती है और सभी खिलाड़ियों का सही समय पर पहुंचना महत्वपूर्ण है। वे सरकारी एजेंसियों और आयोजकों से जल्द प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।

    भारतीय शतरंज में नए सितारों के उभरने के साथ-साथ उनके समर्थन और निरंतर भागीदारी के लिए बेहतर व्यवस्थाओं की जरूरत भी सामने आ रही है। प्रणेशक की वीजा समस्या इसी संदर्भ में एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है जिससे भविष्य में ऐसी कठिनाइयों से बचने की योजना बनाना आवश्यक है।

    जहां तक टूर्नामेंट की बात है, फीडे वर्ल्ड टीम रैपिड और ब्लिट्ज चैम्पियनशिप विश्व के सर्वश्रेष्ठ शतरंज खिलाड़ियों को एक मंच पर लाने वाला आयोजन है। भारत की इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति को बरकरार रखने के लिए प्रत्येक खिलाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    इसलिए अब सभी की निगाहें वीजा की मंजूरी और प्रणेशक के समय पर पहुंचने पर टिकी हैं ताकि भारतीय टीम बिना किसी बाधा के इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में हिस्सा ले सके और देश का मान बढ़ा सके।

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