सिवनी में रिश्तों का ‘अनोखा सरेंडर’: जब पति ने खुद थाने ले जाकर पत्नी को प्रेमी के सुपुर्द किया, थानेदार भी रह गए हैरान!

अक्सर आपने प्यार में बेवफाई, झगड़े और अदालती लड़ाइयों की खबरें सुनी होंगी, लेकिन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने 'वो सात फेरे और सात जन्मों के वादे' की परिभाषा ही बदल दी। यहाँ एक पति ने अपनी पत्नी की जिद और उसके प्यार के आगे घुटने टेकते हुए उसे उसके प्रेमी के साथ जाने की लिखित मंजूरी दे दी। केवलारी थाने में जब पति, पत्नी और प्रेमी एक साथ मेज पर बैठे और आपसी सहमति से जुदा होने का फैसला किया, तो पुलिसकर्मी भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाए। यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

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    सिवनी, राष्ट्रबाण। घटना सिवनी जिले के केवलारी थाना क्षेत्र की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम अहरवाड़ा निवासी ‘शंशाक लखेरा’ का विवाह अप्रैल 2024 में ‘अपूर्वा लखेरा’ के साथ बड़े ही धूमधाम से हुआ था। परिवार को उम्मीद थी कि शंशाक और अपूर्वा का वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा होगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ ही समय बाद अपूर्वा के व्यवहार में बदलाव आने लगा।

    शादी के बाद भी अपूर्वा का मन अपने ससुराल में नहीं लगा। उसकी वजह बना गांव का ही एक युवक ‘जयदीप तिवारी’। बताया जा रहा है कि अपूर्वा और जयदीप के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। शादी के बाद भी दोनों के बीच बातचीत और गुपचुप मुलाकातों का सिलसिला थमा नहीं। जब यह बात पति शंशाक और परिवार के सामने आई, तो घर में कलह शुरू हो गई।

    पंचायत और समझाइश भी रही नाकाम

    शंशाक ने एक आदर्श पति की तरह अपनी पत्नी को समझाने की बहुत कोशिश की। जानकारों की माने तो, सामाजिक स्तर पर भी कई बार बैठकें हुईं, बुजुर्गों ने अपूर्वा को गृहस्थी बसाने की दुहाई दी, लेकिन प्यार का जुनून अपूर्वा के सिर चढ़कर बोल रहा था। अपूर्वा ने स्पष्ट कर दिया कि वह जयदीप के बिना नहीं रह सकती। आखिरकार, रोज-रोज के झगड़ों और मानसिक तनाव से तंग आकर पति शंशाक ने एक ऐसा साहसी फैसला लिया, जिसकी उम्मीद कम ही लोग करते हैं।

    थाने में हुआ ‘त्रिकोणीय’ समझौता

    बीती 17 अप्रैल को केवलारी थाना एक ऐतिहासिक समझौते का गवाह बना। पति, पत्नी और प्रेमी तीनों पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस के सामने पत्नी अपूर्वा ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह अपने प्रेमी जयदीप तिवारी के साथ ही रहना चाहती है। पत्नी की अडिग जिद को देखते हुए पति शंशाक ने भी अपना दिल बड़ा किया और लिखित आवेदन देकर कहा कि उसे अपनी पत्नी के प्रेमी के साथ जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। प्रेमी जयदीप तिवारी ने भी लिखित में जिम्मेदारी ली कि वह अपूर्वा को अपनी पत्नी की तरह रखेगा और उसका पूरा ख्याल रखेगा।

    कानूनी पेच और पुलिस का रुख

    केवलारी थाना पुलिस ने तीनों पक्षों के बयानों और लिखित आवेदनों को दर्ज कर लिया है। चूंकि तीनों पक्ष बालिग हैं और आपसी सहमति से यह कदम उठा रहे हैं, इसलिए पुलिस ने इसे ‘आपसी रजामंदी’ का मामला मानकर डायरी में दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जब तीनों पक्ष राजी हैं, तो कानूनन इसमें हस्तक्षेप की गुंजाइश कम हो जाती है।

    सामाजिक विमर्श, मजबूरी या महानता?

    यह घटना सार्वजनिक हुई तो कुछ लोग पति शंशाक के इस कदम को उसकी “महानता” और “शांतिप्रिय सोच” बता रहे हैं कि उसने जबरदस्ती का रिश्ता ढोने के बजाय सम्मानजनक विदाई दी। वहीं, समाज का एक वर्ग इसे नैतिक मूल्यों का पतन मान रहा है। परंतु, इन सबसे परे यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि बदलते दौर में अब लोग विवाद और हिंसा के बजाय ‘लिखित समझौतों’ और ‘आपसी सहमति’ को प्राथमिकता दे रहे हैं। सिवनी का यह मामला सालों तक एक नजीर के तौर पर याद किया जाएगा कि कैसे एक पति ने अपनी खुशियों की कुर्बानी देकर अपनी पत्नी को उसके ‘प्यार’ के हवाले कर दिया।

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