भीषण गर्मी के बीच मध्य प्रदेश में गहराता जल संकट, कांग्रेस-भाजपा में राजनीतिक विवाद तेज

Rashtrabaan

    भोपाल। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी और लू की आग में झुलस रहा है। राज्य के कई जिलों में तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिससे पेयजल संकट और गंभीर रूप ले चुका है। पानी की कमी कांग्रेस और भाजपा के बीच नई सियासी जंग का रूप ले चुकी है।

    अत्यधिक गर्मी के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित हो रही है। इस स्थिति पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार और उसके शासित नगर निकायों पर कड़ा हमला बोला है।

    विधायिका में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन और नल-जल योजनाओं पर भारी धनराशि खर्च की गई, फिर भी आम जनता को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि आदिवासी महिलाएं कई किलोमीटर चलकर पानी लाने को मजबूर हैं और बच्चे दूषित जल पीने को विवश हैं।

    उमंग सिंघार ने कहा, “मध्य प्रदेश की जनता आज पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के अभाव में त्रस्त है। गांवों में जल संकट तेजी से बढ़ रहा है और सरकार इस सम्बंध में गंभीर नहीं दिख रही है।”

    उमंग सिंघार ने दावा किया कि वर्ष 2024-26 के दौरान जल जीवन मिशन के तहत लगभग 25,000 करोड़ रुपये और ग्रामीण नल-जल योजना के अंतर्गत 490 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन इनका लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाया।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से जल संकट की तस्वीरें सामने आ रही हैं। उमरिया जिले में वायरल हुए वीडियो में बच्चे पानी लेने के लिए कई किलोमीटर दूर तक पैदल जाते दिख रहे हैं। कुएं और हैंडपंप सूख चुके हैं।

    गुना जिले के टांडा गांव में ग्रामीण गड्ढों में कीचड़युक्त पानी इकट्ठा करते पाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि जल की कमी के कारण मनुष्य और पशु दोनों एक ही जल स्रोत पर निर्भर हैं।

    राजधानी भोपाल, जो झीलों का शहर कहा जाता है, वहां भी हालात चिंताजनक हैं। बोरवेल सूखने लगे हैं और नर्मदा जलापूर्ति में कमी आई है। कुछ इलाकों में पानी केवल 12 से 15 मिनट ही मिलता है।

    जल संकट के बढ़ने से निजी टैंकरों पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है। पहले 5,000 लीटर पानी का टैंकर 350 रुपये में मिलता था, अब इसकी कीमत 450 से 500 रुपये तक पहुंच गई है।

    इस सप्ताह मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में जल संकट और जल की गुणवत्ता को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, इंदौर के 29 वार्डों में लिए गए 240 जल नमूनों में 98 प्रतिशत में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए।

    भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे सस्ती राजनीति बताया। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने में लगे हुए हैं।

    राज्य सरकार पाइपलाइन विस्तार, जल संरक्षण और जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण जैसी परियोजनाओं को प्रमुखता से प्रदर्शित कर रही है। लेकिन गर्मी और बढ़ती जनप्रियता के बीच जल संकट आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है।

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