भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया और उनके परिवार से जुड़ी लगभग 18.20 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई भोपाल जोनल कार्यालय द्वारा की गई, जो भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ ठोस कदम माना जा रहा है।
यह मामला विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), इंदौर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत आरोप लगाए गए थे। शिकायत में यह कहा गया कि धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने अपनी घोषित आय के स्रोत के अलावा अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की है, जो जांच का आधार बनी।
जांच के दौरान पाया गया कि वर्ष 1987 से 31 अगस्त 2025 तक की अवधि में आरोपी और उनके परिवार ने वैध आय की तुलना में कहीं अधिक संपत्ति जमा की है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनकी वैध आय लगभग 2 करोड़ रुपए थी, जबकि इस अवधि के दौरान उन्होंने और उनके परिवार ने करीब 11.18 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित और खर्च की। इस प्रकार 9.18 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति मिली, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 459 प्रतिशत अधिक थी।
तलाशी अभियान में कई ठिकानों और बैंक लॉकरों से भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, बुलियन यानी सोने की ईंटें और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये सभी संपत्तियां धर्मेंद्र सिंह भदौरिया और उनके परिवार से संबंधित थीं। पूछताछ में आरोपी ने इन संपत्तियों पर अपना स्वामित्व स्वीकार किया, परन्तु ये साबित करने में असमर्थ रहे कि ये उनकी वैध आय से प्राप्त हुई हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि जांच अवधि के दौरान परिवार के नाम पर कई उच्च मूल्य की संपत्तियां खरीदी गईं, जिनके वित्तीय स्रोत अस्पष्ट थे। उक्त संपत्तियों को वैध आय के अनुरूप नहीं माना गया और इन्हें गैरकानूनी तरीके से अर्जित संपत्ति माना गया।
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत, ईडी ने इस संपत्ति को अपराध से अर्जित आय मानते हुए लगभग 18.20 करोड़ रुपए कीमत वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जब्त संपत्तियों में नकदी, आभूषण और अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें आगे किसी भी तरीके से ट्रांसफर करने या बेचने से रोका गया है।
ईडी ने यह कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए की है कि ये संपत्तियां कानूनी जटिलताओं से बचकर न जाएं और भविष्य में संभावित जांच और अभियोजन के लिए सुरक्षित रहें। एजेंसी ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच चल रही है और अन्य पहलुओं का भी निरीक्षण किया जा रहा है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

