भोपाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिवार पर बड़ा शिकंजा कसते हुए लगभग 67.25 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई जांच के बाद हुई है।
ईडी ने विशेष पुलिस स्थापना (एसपीई), लोकायुक्त, भोपाल द्वारा गोविंद प्रसाद मेहरा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों पर दर्ज एफआईआर के मद्देनजर यह कार्रवाई की है। जांच में यह पाया गया कि 4 मार्च 1985 से 29 फरवरी 2024 की अवधि के दौरान मेहरा ने लोक निर्माण विभाग में रहते हुए अपनी ज्ञात वैध आय के मुकाबले कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है। बैंकिंग और वित्तीय जांच से पता चला कि उनकी कुल संपत्ति 10 करोड़ रुपए से अधिक है, जबकि वैध आय केवल 4 करोड़ रुपए बताई गई है।
ईडी की टीम ने मेहरा और उनके परिवार के परिसरों की तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकद, सोने के आभूषण, चांदी के सामान और अन्य कीमती वस्तुएं बरामद की हैं। कुल मिलाकर 8.79 लाख रुपए की नकदी और लगभग 3.51 करोड़ रुपए मूल्य के सुवर्ण आभूषण जब्त किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि मेहरा परिवार ने नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील के सैनी गांव में ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ नामक लगभग 7,072 एकड़ भूमि पर एक शानदार फार्म-रिसॉर्ट बनाया। इस रिसॉर्ट में प्रीमियम कॉटेज, आवासीय इकाइयां, आंतरिक सड़कें, कृत्रिम जल निकाय एवं कृषि बुनियादी ढांचे सहित अन्य महंगे सुविधाएं शामिल हैं। इस संपत्ति का बाजार मूल्य करीब 49.44 करोड़ रुपये आंका गया है, जिसमें लगभग 16 करोड़ रुपए का निर्माण वैल्यू शामिल है।
गोविंद प्रसाद मेहरा ने अपनी संपत्तियों के अधिग्रहण के संबंध में कोई ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य नहीं पेश किए हैं। उनके द्वारा दी गई सफाइयां जांच में असंबद्ध पाई गईं। मामले में आगाह किया गया है कि ये संपत्तियां अपराध से अर्जित धन के रूप में प्रयुक्त की गईं हैं। इसकी पुष्टि पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत एसपीई, लोकायुक्त के साथ साझा की गई है।
ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत 67.25 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। कुर्क संपत्तियों में मुख्य रूप से आवासीय घर, नकद, आभूषण और कृषि फार्म रिसॉर्ट शामिल हैं। ईडी की ओर से इस मामले की जांच लगातार जारी है और साथ ही संबंधित अपराधों की तहकीकात भी की जा रही है।
यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सरकार की जंग को मजबूत करती है और सरकारी विभागों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देगी। इससे यह संदेश भी जाता है कि सार्वजनिक सेवा से अधिक कमाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ईडी की इस कड़ी कार्रवाई से अन्य अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए भी यह चेतावनी बनी हुई है कि वे गलत संपत्ति अर्जित करने से बचें और कानून का सम्मान करें। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं जो भ्रष्ट प्रथाओं के विरुद्ध ठोस कदम साबित होंगे।

