भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धार स्थित प्राचीन भोजशाला परिसर में भव्य सरस्वती लोक बनाने की महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। इसके साथ ही राजा भोज संस्थान की स्थापना भी की जाएगी ताकि इस ऐतिहासिक स्थल को पुनः उसके गौरवशाली अतीत की ओर ले जाया जा सके। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले दी।
मोहन यादव ने बताया कि इस भोजशाला को राजा भोजपाल द्वारा स्थापित किया गया था, जो सदियों से ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और संस्कृत भाषा का उत्कृष्ट केंद्र रहा है। उन्होंने बताया कि भोजशाला में दूर-दूर से विद्यार्थी और विद्वान शास्त्रों का अध्ययन और चर्चा करने आते थे। राज्य सरकार इस गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धार में राजा भोज की कर्मस्थली पर राजा भोज शोध संस्थान स्थापित किया जाएगा, जो ज्ञान के नए आयामों को खोलने में मदद करेगा। इसके माध्यम से यहाँ के संदर्भ में शोध कार्य और सांस्कृतिक संरक्षण को भी बल मिलेगा।
गोवा से जुड़ी एक दुखद घटना का स्मरण करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों बनसिंह, अंतरसिंह एवं लक्मृण सिंह के निकटतम परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह राज्य सरकार का उनका सम्मान है और उनके योगदान को याद रखने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के राष्ट्र सेवा कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकास, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा, सांस्कृतिक गौरव, डिजिटल क्रांति और वैश्विक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने अंतिम पंक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने की बात कही है और राष्ट्रीय एकता, गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं तथा महिलाओं के उत्थान पर जोर दिया।
समान नागरिकता संहिता पर सुझाव प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री ने वेबसाईट निर्माण की पहल की तारीफ की और बताया कि जिलों में उच्च स्तरीय समितियाँ भ्रमण कर जनता, राजनीतिक दल एवं गैर-सरकारी संस्थाओं से इस विषय पर सुझाव ले रही हैं। सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 रखी गई है।
उन्होंने मंत्रिपरिषद को निर्देश दिए कि वे इस उच्च स्तरीय समिति और वेबसाईट के प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इन प्रयासों से धार की भोजशाला पुनः अपने ज्ञान और संस्कृति के केन्द्र के रूप में स्थापित होगी।

