NEET परीक्षा के पेपर लीक होने की घटना ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में कांग्रेस ने मोदी सरकार पर कड़ी आपत्तियां जताई हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है। इसी संकट के बीच, राहुल गांधी युवाओं के बीच सक्रिय होकर उनकी आवाज़ बनने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने “छात्रों की गूंज” नामक एक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य प्रभावित छात्रों की समस्याओं को उजागर करना और उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाना है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस अभियान में मध्य प्रदेश कांग्रेस के योगदान को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और कोटा में शुरू हुई लड़ाई को अब पूरे देश में बदलाव की मशाल के रूप में फैलाना है। इसके लिए प्रदेश की युवा शक्ति और छात्र समूहों को एकजुट करने का आह्वान किया गया है।
राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों की आवाज़
राहुल गांधी ने NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर “छात्रों की गूंज” अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य छात्र समुदाय के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आंतरिक समस्याएं, सुझाव और अनुभव सुनना तथा उनको कानूनी और राजनीतिक समर्थन प्रदान करना है। इसी संदर्भ में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ‘युवा मामलों’ की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो सीधे छात्रों से संवाद करेगी और उनकी मांगों को आगे बढ़ाएगी।
कांग्रेस का जनआंदोलन बनाने का संकल्प
जीतू पटवारी ने कहा कि इस अभियान को केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि एक सामाजिक जनआंदोलन के रूप में गढ़ा जाएगा। उन्होंने छात्रों की आवाज़ को बुलंद करने और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई को मजबूत करने का भरोसा व्यक्त किया। इस समिति में कुल 12 सदस्य हैं, जो विभिन्न जिलों और समुदायों के छात्रों से संवाद करेंगे और उनकी समस्याएं केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे ताकि उनके हितों की रक्षा हो सके।
युवा मामलों की समिति के सदस्य
मध्य प्रदेश कांग्रेस की युवा मामलों की समिति में प्रियव्रत सिंह, जयवर्धन सिंह, सचिन यादव, कुनाल चौधरी, यश घनघोरिया, विपिन वानखेड़े, मितेंद्र दर्शन सिंह, आशुतोष चौकसे, मनीष चौधरी, पोरालाल खरते, आनंद जाट और सदफ खान शामिल हैं। ये सदस्य छात्रों के हित में निरंतर संवाद और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करेंगे।
इस आंदोलन के माध्यम से कांग्रेस का उद्देश्य छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व न्याय सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में यह अभियान और अधिक प्रभावी होकर छात्रों को सशक्त बनाने में मदद करेगा।

