जयपुर। राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की तैयारियाँ तेजी से हो रही हैं। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने बताया कि राज्य सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रस्तावित कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी गठित की है। यह कमेटी ऐसे कानून के निर्माण को सुनिश्चित करेगी जो सभी नागरिकों के लिए समान और न्यायसंगत होगा।
सरकारी सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यूसीसी लागू करना संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप एक ऐतिहासिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। इससे राज्य में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और गुजारा-भत्ता जैसे मामलों में एकरूपता आएगी। उनके अनुसार, इस पहल से समुदायों के रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए कानून को प्रगति की दिशा में ले जाया जाएगा।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि “राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026” के लिए गठित कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। कमेटी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं जैसे कि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एडिशनल एडवोकेट जनरल बसंत सिंह छाबा, लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल रामस्वरूप अग्रवाल और समाजशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. शुचि चौहान। इस कमेटी का उद्देश्य है कि विभिन्न समुदायों के विचारों और सांस्कृतिक पक्षों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और समावेशी ड्राफ्ट तैयार किया जाए।
बेढम ने यह भी बताया कि कमेटी अपनी चर्चा डिविजनल स्तर पर भी करेगी ताकि हर क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को समझा जा सके। जनता की राय को आमंत्रित करने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे सामान्य नागरिक सीधे इस कानून के निर्माण में भाग ले सकेंगे और सुझाव दे सकेंगे। इस प्रक्रिया में जम्मू से लेकर बाड़मेर तक सभी को शामिल किया जाएगा, जिससे यूसीसी राज्य के सामाजिक ताने-बाने के अनुरूप बनेगा।
मंत्रियों ने बताया कि प्रस्तावित कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान होंगे जिनमें शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूरी रोक और लिव-इन रिलेशनशिप का भी पंजीकरण शामिल होगा। इसके साथ ही बेटी और बेटे को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार दिए जाएंगे, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। ये बदलाव पारंपरिक पर्सनल लॉ की अपेक्षा एक अधिक न्यायसंगत और आधुनिक समाज की ओर कदम हैं।
राजस्थान सरकार इस पहल को प्रगतिशील, संतुलित और सामाजिक विविधताओं का सम्मान करने वाला कानून बनाने के रूप में देखती है। इसका उद्देश्य केवल कानून बनाना ही नहीं है, बल्कि हर नागरिक को समानता, पारदर्शिता और न्याय की भावना देना भी है। सरकार का विश्वास है कि इस यूनिफॉर्म सिविल कोड के अधिनियम से सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

